Rahul Gandhi Bela Estate में वोटर लिस्ट विवाद के बीच पहुंचे राहुल गांधी
by: vishal rajput
दिल्ली के बेला एस्टेट में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम गायब होने के मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सोमवार को बेला एस्टेट पहुंचे और वहां रहने वाले लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मतदाता सूची में नाम नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों से जानकारी ली और संबंधित अधिकारी से भी फोन पर बात की।
Rahul Gandhi Bela Estate में 729 में से 728 नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
बेला एस्टेट के जिस पोलिंग पार्ट को लेकर मामला सामने आया है, वहां पहले 729 मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में इनमें से सिर्फ एक नाम दिखाई दिया, जबकि 728 नाम शामिल नहीं थे।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, नाम हटने की प्रक्रिया में मृत, डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं जैसी अलग-अलग श्रेणियां शामिल थीं। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक बड़ी संख्या में मतदाताओं को इलाके से स्थानांतरित माना गया है।
Rahul Gandhi Bela Estate में लोगों ने बताई अपनी परेशानी
बेला एस्टेट के स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी इलाके में रह रहे हैं। उनका दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारी उनके पास पहुंचे थे और एन्यूमरेशन फॉर्म दिए गए थे। लोगों के मुताबिक उन्होंने फॉर्म भरकर जमा भी किए, लेकिन बाद में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम नहीं मिले।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले उनके घर यमुना किनारे थे। बाद में घर हटाए जाने के बाद उन्होंने आसपास के इलाके में अस्थायी ठिकाने बना लिए। उनका कहना है कि उन्होंने क्षेत्र पूरी तरह नहीं छोड़ा है और इसके बावजूद बड़ी संख्या में नामों को स्थानांतरित श्रेणी में रखा गया है।
Rahul Gandhi Bela Estate में एसडीएम से फोन पर हुई बातचीत
राहुल गांधी ने स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद एक एसडीएम से फोन पर बात की। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अधिकारी से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आधार पूछा और अधिकारी का नाम तथा पदनाम भी पूछा। राहुल गांधी ने इस मामले में स्थानीय लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई की बात कही।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो के जरिए दावा किया कि बेला एस्टेट में रहने वाले लोगों में से बड़ी संख्या के नाम एसआईआर के बाद मतदाता सूची में नहीं रहे। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि घर का पक्का होना या नहीं होना मतदान के अधिकार से अलग मुद्दा है।
Rahul Gandhi Bela Estate मामले में चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा
चुनाव अधिकारियों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार, पुराने मतदाता रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में पते केवल ‘एग्रीकल्चर’ के रूप में दर्ज थे, जबकि कुछ मतदाताओं के पते पर मकान नंबर भी दर्ज थे। अधिकारियों के मुताबिक इलाके में पहले कृषि गतिविधियां होती थीं, लेकिन बाद में इसमें बदलाव आया और 2022-23 के दौरान वहां मौजूद घरों और अन्य आवासीय ढांचों को हटाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों को पुराने मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज पते पर जाकर मतदाताओं की स्थिति का सत्यापन करना था। पुराने पते पर मकान नहीं मिलने के कारण संबंधित मतदाताओं की सामान्य निवास स्थिति में बदलाव माना गया और उनके नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं किए गए।
Rahul Gandhi Bela Estate विवाद में नाम दोबारा जुड़वाने का मौका
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम बाहर होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी पात्र व्यक्ति का मतदान का अधिकार हमेशा के लिए समाप्त हो गया। पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं, वे दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के तहत Form-6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। दिल्ली की एसआईआर प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 बताई गई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जानी है।
Rahul Gandhi Bela Estate मामले में बेघर मतदाताओं का मुद्दा भी उठा
बेला एस्टेट मामले ने बेघर और अस्थायी ठिकानों पर रहने वाले लोगों के मतदाता पंजीकरण के सवाल को भी चर्चा में ला दिया है। उपलब्ध चुनावी नियमों के मुताबिक पात्र बेघर मतदाताओं के सामान्य निवास का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है। इसके लिए केवल पक्के मकान का होना ही एकमात्र आधार नहीं है।
यही वजह है कि बेला एस्टेट के मामले में मुख्य सवाल यह है कि जिन लोगों ने अपने पुराने घर खोने के बाद आसपास ही रहना जारी रखा, उनकी वर्तमान निवास स्थिति को मतदाता सूची में किस तरह दर्ज किया जाना चाहिए।
Rahul Gandhi Bela Estate विवाद पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
बेला एस्टेट में मतदाता सूची से नाम हटने का मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव अधिकारियों ने नामों को ड्राफ्ट सूची से बाहर किए जाने के पीछे सत्यापन और पुराने पते से जुड़ी स्थिति का हवाला दिया है।
फिलहाल प्रभावित मतदाताओं के लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए अपने नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का रास्ता खुला है। अंतिम सूची जारी होने से पहले इस प्रक्रिया के तहत किए जाने वाले आवेदनों और उनके सत्यापन पर पूरे मामले की आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
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