Report by: Shashank Mahule
PM Awas Yojana: मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की वारासिवनी विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत झालीवाड़ा में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यहां के गरीब परिवार पिछले कई वर्षों से पक्के घर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
PM Awas Yojana: कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर परिवार
गांव में कई परिवार आज भी कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जहां मकान गिरने और हादसों का खतरा लगातार बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पात्रता सूची में शामिल होने के बावजूद वर्षों से योजना का लाभ नहीं पा सके हैं।
पात्रता के बावजूद नहीं मिला लाभ
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2017–18 की सूची में कई परिवारों के नाम शामिल थे। इसके बावजूद करीब 80 से अधिक परिवार अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पोर्टल में उनके नाम के सामने “5 एकड़ भूमि” दर्ज दिखाकर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया, जबकि वास्तविकता में उनके पास कोई बड़ी जमीन नहीं है।
PM Awas Yojana: 10 साल से दफ्तरों के चक्कर
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पिछले लगभग 10 वर्षों से पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक आवेदन और शिकायत कर चुके हैं। यहां तक कि कलेक्टर और उच्च अधिकारियों तक भी मामला पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। जानकारी के अनुसार, पूरे बालाघाट जिले में करीब 8,205 परिवार इस तरह की तकनीकी या सिस्टम त्रुटि के कारण प्रभावित हुए हैं।
ग्राम पंचायत झालीवाड़ा की सरपंच उमेश्वरी देशमुख का कहना है कि उन्होंने भी कई बार पीएम आवास योजना के अधिकारियों, जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री तक इस मामले की शिकायत पहुंचाई, लेकिन करीब दस साल बाद भी गरीबों को उनका हक नहीं मिल पाया।
PM Awas Yojana: स्थानीय स्तर पर भी उठे सवाल
क्षेत्र के समाजसेवी मोनू सरोवर देशमुख ने भी सिस्टम की अनदेखी और अधिकारियों की उदासीनता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि लंबे समय से गरीब परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया।
PM Awas Yojana: प्रशासन का पक्ष
वहीं बालाघाट पीएम आवास योजना की प्रभारी नेत्रा यूके ने माना कि कई गरीब परिवार लंबे समय से योजना के लाभ से वंचित हैं। कई मामलों में पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के कारण पात्र परिवारों को गलत तरीके से “5 एकड़ भूमि” दर्ज दिखाकर रिजेक्ट किया गया।
मामले की जांच के लिए दोबारा सर्वे कराया गया है और रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। साथ ही “आवास प्लस 2.0” के तहत छूटे हुए परिवारों को दोबारा शामिल करने के निर्देश शासन की तरफ से आएं हैं।
PM Awas Yojana: सवाल जस का तस: कब मिलेगा गरीबों को घर?
अब बड़ा सवाल यह है कि जिन परिवारों को वर्षों पहले योजना का लाभ मिल जाना चाहिए था, उन्हें उनका हक कब मिलेगा? क्या यह तकनीकी गलती है या सिस्टम की लापरवाही—इस पर प्रशासनिक जवाब का इंतजार अभी भी जारी है।





