BY
Yoganand Shrivastava
Kolkata पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की तफ्तीश में बंगाल की स्थानीय पुलिस की एक बेहद शर्मनाक लापरवाही उजागर हुई है। लोकल पुलिस ने नाम के कन्फ्यूजन के चलते एक निर्दोष व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेज दिया था। अब सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से इस पूरे हत्याकांड के असली मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है।

Kolkata नाम के फेर में फंसी बंगाल पुलिस, निर्दोष को काटनी पड़ी 13 दिन की कस्टडी
शुरुआती जांच के दौरान बंगाल पुलिस के इनपुट के आधार पर उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरफ्तारियां की गई थीं। पुलिस ने बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य को दबोचा था। वहीं, यूपी के बलिया से राज सिंह नाम के एक युवक को हिरासत में लिया गया। बंगाल पुलिस ने इस राज सिंह को मुख्य आरोपी मानकर कोर्ट से उसकी १३ दिनों की रिमांड भी ले ली थी, जबकि युवक के परिजनों का लगातार दावा था कि घटना के वक्त वह अयोध्या में मौजूद था और उसका इस अपराध से कोई लेना-देना नहीं है।

Kolkata CBI की एंट्री से हुआ दूध का दूध और पानी का पानी, मुजफ्फरनगर से मिला ‘असली’ गुनहगार
जब इस हाईप्रोफाइल मामले की कमान सीबीआई के हाथों में आई, तो पूरी कहानी पलट गई। सीबीआई ने तकनीकी साक्ष्यों और गहन कूटनीतिक इनपुट के आधार पर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में छापेमारी की। वहां से केंद्रीय एजेंसी ने असली आरोपी ‘राजकुमार’ को गिरफ्तार किया, जिसे अंडरवर्ल्ड और अपराध की दुनिया में ‘राज सिंह’ के नाम से भी जाना जाता है। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि यही राजकुमार इस पूरी हत्या का असली साजिशकर्ता और मुख्य सूत्रधार है। इसके बाद अदालत ने पुलिस की गलती के शिकार हुए निर्दोष राज सिंह को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।

Kolkata बनारस से एक और शूटर अरेस्ट, कूटनीतिक जाल में फंसे अब तक 4 आरोपी
Kolkata सीबीआई इस मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ने में तेजी से जुटी हुई है। इसी कड़ी में जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश के ही बनारस (वाराणसी) से विनय राय नाम के एक और संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। इस ताजा गिरफ्तारी के बाद चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में सलाखों के पीछे पहुंचने वाले आरोपियों की कुल संख्या अब चार हो गई है। स्थानीय पुलिस द्वारा नाम की समानता (सेम नाम) के कारण की गई इस भारी चूक ने अब राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिसिया जांच के तौर-तरीकों पर बड़े राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।





