Nepal: भारत ने नेपाल से आने वाली चाय पर लागू किए गए सख्त टेस्टिंग नियमों में राहत देकर नेपाली चाय उद्योग को बड़ी राहत दी है। करीब 19 दिनों तक चली अनिश्चितता के बाद भारत सरकार ने उस स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में संशोधन किया है, जिसकी वजह से नेपाल से होने वाला चाय निर्यात प्रभावित हो रहा था। नए फैसले के बाद सीमा पर अटकी चाय खेपों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और कारोबार के सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Nepal: भारत सरकार ने टेस्टिंग नियमों में दी छूट
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के निर्देश पर भारतीय चाय बोर्ड ने आयातित चाय के लिए लागू अनिवार्य परीक्षण नियमों में बदलाव किया है। अब नेपाल से आने वाली वह चाय, जो भारत के घरेलू बाजार में बिक्री के लिए भेजी जाती है, उसे अनिवार्य लैब टेस्टिंग से राहत मिलेगी।
हालांकि जो चाय भारत के जरिए दूसरे देशों में पुनः निर्यात की जाएगी, उसकी जांच प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। भारतीय सीमा शुल्क विभाग और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया जोखिम प्रबंधन प्रणाली के तहत निगरानी जारी रखेंगे।
Nepal: नेपाल के चाय कारोबारियों ने फैसले का किया स्वागत
नेपाल के चाय उत्पादकों और निर्यातकों ने भारत सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आदित्य पराजुली ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सीमा पर रुकी हुई चाय खेपों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है और जल्द ही निर्यात सामान्य स्थिति में लौट आएगा।
चाय कारोबारी उदय चापागाईं ने कहा कि नेपाल से भारत भेजी जाने वाली अधिकतर चाय भारतीय घरेलू बाजार में ही बिकती है। ऐसे में परीक्षण की अनिवार्यता हटने से सीमा पर देरी कम होगी और अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलेगी।
Nepal: 1 मई से लागू नियमों से बढ़ी थीं मुश्किलें
भारत ने 1 मई से नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू किया था। इसके तहत नेपाल समेत अन्य देशों से आने वाली हर चाय खेप का नमूना लेकर कोलकाता की प्रयोगशाला में जांच अनिवार्य कर दी गई थी।
इस प्रक्रिया के कारण चाय से भरे ट्रक कई दिनों तक सीमा पर फंसे रहते थे। निर्यातकों के अनुसार रिपोर्ट आने में 10 से 14 दिन तक का समय लग रहा था, जिससे व्यापार पर गंभीर असर पड़ रहा था। झापा से पानीटंकी सीमा के रास्ते भेजी गई एक खेप करीब दो सप्ताह तक भारतीय सीमा में अटकी रही थी।
Nepal: कारोबारियों को उठाना पड़ रहा था भारी नुकसान
नई टेस्टिंग व्यवस्था के चलते चाय निर्यातकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा था। लैब जांच की फीस, ट्रकों की लंबी प्रतीक्षा और माल की डिलीवरी में देरी से कारोबारियों को नुकसान हो रहा था।
नेपाली उद्योग जगत का कहना था कि यह प्रक्रिया व्यापार में अनावश्यक बाधा बन रही है। वहीं भारतीय अधिकारियों ने इसे गुणवत्ता नियंत्रण और मिलावटी चाय पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम बताया था।
Nepal: सीमा पर बनाई गई नई निगरानी व्यवस्था
भारत ने पानीटंकी सीमा क्षेत्र में एक नया कार्यालय भी स्थापित किया है, जहां बिना प्रसंस्कृत चाय के नमूने लिए जाते हैं। भारतीय आयातकों को टी काउंसिल पोर्टल पर खेप से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज करनी पड़ती है।
नई व्यवस्था के अनुसार घरेलू बाजार में बिक्री के लिए आने वाली नेपाली चाय को परीक्षण से राहत मिलेगी, लेकिन पुनः निर्यात के लिए भेजी जाने वाली चाय की जांच जारी रहेगी।
Nepal: नेपाल सरकार के हस्तक्षेप के बाद बदला फैसला
नेपाल के चाय कारोबार पर असर बढ़ने के बाद नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने इस मुद्दे को भारतीय अधिकारियों के सामने उठाया था। नेपाल के कार्यवाहक राजदूत सुरेन्द्र थापा ने कहा कि भारत सरकार ने नेपाल की चिंताओं को सकारात्मक तरीके से लिया और पुराने निर्णय में संशोधन किया।
नेपाल सरकार और उद्योग जगत लगातार यह मांग कर रहे थे कि व्यापार को प्रभावित करने वाले नियमों में व्यावहारिक बदलाव किए जाएं।
Nepal: नेपाल के चाय निर्यात में आई गिरावट
नेपाल के सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में देश का चाय निर्यात 19 प्रतिशत घटकर 2.89 अरब नेपाली रुपये रह गया। भारत अभी भी नेपाल की चाय का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल को भविष्य में इस तरह की व्यापारिक चुनौतियों से बचने के लिए पाकिस्तान, चीन, रूस और मध्य-पूर्व जैसे नए बाजारों की तलाश करनी चाहिए ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
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