रिपोर्टर: निज़ाम अली
Pilibhit सिरसा के संरक्षित वन क्षेत्र (जंगल) से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने और अवैध कटान का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ लकड़ी माफियाओं ने वन विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से सागौन (शागुन) और साल के कई दर्जन बेशकीमती और हरे-भरे पेड़ों पर आरी चला दी। जंगल के भीतर पेड़ों के कटे हुए ठूंठ मिलने के बाद से ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

Pilibhit रातों-रात गायब की जा रही है कीमती लकड़ी, ग्रामीणों में भारी रोष
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लकड़ी तस्करों का यह गिरोह जंगल में सक्रिय है जो अंधेरे का फायदा उठाकर रातों-रात हरे-भरे पेड़ों को काट रहा है और कीमती लकड़ियां गाड़ियों में लादकर गायब कर रहा है। प्रकृति और पर्यावरण की इस बेरहम बर्बादी को देखकर स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में वन विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है।

Pilibhit रक्षक ही बने भक्षक? विभागीय कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप
इस पूरे अवैध कटान ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और गश्त दावों की पोल खोलकर रख दी है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि बिना स्थानीय विभागीय अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की शह या मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर सागौन और साल जैसे मजबूत पेड़ों का कटान और परिवहन संभव नहीं है। ऐसे में सुरक्षा में तैनात जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी अब कड़े सवालों के घेरे में है।

Pilibhit पर्यावरण को पहुंच रही भारी क्षति, उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग
अवैध कटान के चलते सिरसा का हरा-भरा वन क्षेत्र तेजी से उजड़ रहा है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ काटने वाले माफियाओं के साथ-साथ उनके मददगार विभागीय दोषियों को भी चिह्नित कर उनके खिलाफ तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
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