BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi भारत आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा स्टोरेज का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र (Global Hub) बनने जा रहा है। देश में डिजिटल इकोनॉमी की रफ्तार और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने साल २०३० तक देश की डेटा सेंटर क्षमता को तीन गुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। सरकार की ‘लोकल डेटा स्टोरेज’ (डेटा संप्रभुता) नीति के चलते दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां अब भारत का रुख कर रही हैं, जिससे देश में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने तय हैं।

New Delhi देश के इन महानगरों में बनेंगे ‘डेटा बैंक’, गूगल बिछा रहा समुद्र के नीचे केबल
वर्तमान में मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर के नोएडा जैसे प्रमुख शहरों को डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) का विशेष फोकस पूर्वी भारत पर है, जिसके लिए वह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अपना विशाल डेटा सेंटर स्थापित कर रही है। इसके लिए गूगल अमेरिका से लेकर विशाखापत्तनम तक समुद्र के नीचे (Subsea) एक हाई-कैपेसिटी केबल नेटवर्क बिछाने जा रहा है। इससे न केवल डेटा ट्रांसफर की गति बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर डेटा की निगरानी और सुरक्षा के लिए हजारों तकनीकी नौकरियां भी पैदा होंगी।

New Delhi भारत में दुनिया का 20% डेटा हो रहा जनरेट, दिग्गज कंपनियों ने खोले तिजोरी के द्वार
New Delhi एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में पूरी दुनिया का लगभग २० प्रतिशत डेटा अकेले भारतीय यूजर्स द्वारा जनरेट किया जा रहा है। जेनरेटिव एआई की बढ़ती लोकप्रियता के कारण डेटा की यह खपत आने वाले समय में चार गुना तक बढ़ने का अनुमान है। यही वजह है कि माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में अपने पैर जमाने के लिए करीब २०० बिलियन डॉलर तक के विशाल निवेश की रूपरेखा तैयार कर चुकी हैं। स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोर होने से भारतीय यूजर्स की गोपनीयता (Privacy) और साइबर सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।

New Delhi रिलायंस और अदाणी ग्रुप भी रेस में शामिल, ग्रीन एनर्जी से चलेंगे ‘नेक्स्ट-जेन’ डेटा सेंटर
वैश्विक कंपनियों के साथ-साथ भारत के दो सबसे बड़े औद्योगिक घराने भी इस रेस में मजबूती से उतर चुके हैं। अदाणी ग्रुप देश में एआई-रेडी (AI-Ready) डेटा सेंटर नेटवर्क बनाने के लिए १०० बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है, जो पूरी तरह से रिलायंस और रिन्यूएबल (सौर व पवन) एनर्जी पर आधारित होगा। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज भी भारत को ग्लोबल इंटेलिजेंस में सबसे आगे ले जाने के लिए १२० बिलियन डॉलर की लागत से ‘नेक्स्ट जनरेशन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर’ तैयार करने जा रही है। हाल ही में हुए ‘इंडिया एआई समिट’ में ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के प्रमुखों ने भी माना है कि भारत का एआई मिशन दुनिया के तकनीकी भूगोल को बदलने की क्षमता रखता है।
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