Indore इंदौर हनीट्रैप का ‘भोपाल कनेक्शन’: हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग गिरोह में नेत्री आरोपी, जेल में रची गई थी रसूखदारों को फंसाने की साजिश

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Indore मध्य प्रदेश का बहुचर्चित इंदौर हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग मामला हर दिन एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले रहा है। इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही तफ्तीश में अब इस संगठित गिरोह के तार भोपाल सहित देश के कई अन्य महानगरों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के हाथ कई आपत्तिजनक वीडियो और डिजिटल डेटा लगे हैं, जिसके बाद इस जाल में कई और सफेदपोशों, नौकरशाहों और बड़े व्यापारियों के फंसने की कगार पर होने की आशंका तेज हो गई है।

Indore गिरोह में सागर की भाजपा नेत्री का नाम शामिल, पुलिस ने बनाया आरोपी

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब इंदौर क्राइम ब्रांच की जांच की आंच सागर की भाजपा नेत्री रेशू चौधरी तक पहुंच गई। पुलिस ने पुख्ता सबूतों के आधार पर रेशू चौधरी को इस मामले में नामजद आरोपी बनाया है। आरोप है कि रेशू चौधरी, इस गिरोह की मुख्य सरगना श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई थी। यह तिकड़ी मिलकर बड़े नेताओं, रसूखदार अफसरों और नामी कारोबारियों को अपने हुस्न के जाल में फंसाती थी और फिर उनके गोपनीय व आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल करती थी।

Indore जेल में हुई थी आरोपियों की मुलाकात, भोपाल बना ब्लैकमेलिंग का हेडक्वार्टर

Indore पुलिस की शुरुआती पूछताछ और तफ्तीश में एक बेहद दिलचस्प तथ्य सामने आया है। पहले के हनीट्रैप मामलों की आरोपी श्वेता जैन और अलका दीक्षित की मुलाकात जेल के भीतर हुई थी। जेल की सलाखों के पीछे ही इन शातिर महिलाओं ने ब्लैकमेलिंग का यह नया और अभेद्य नेटवर्क तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। जेल से बाहर आने के बाद राजधानी भोपाल को इस सिंडिकेट का मुख्य केंद्र (हेडक्वार्टर) बनाया गया, जहां बैठकर रसूखदारों को शिकार बनाने की रणनीतियां और साजिशें बुनी जाती थीं।

Indore शराब कारोबारी की शिकायत पर एक्शन, फॉरेंसिक जांच से खुलेंगे कई बड़े राज

उल्लेखनीय है कि इंदौर के एक बड़े शराब व्यवसाई को ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलने के मामले में क्राइम ब्रांच पहले ही कड़ा रुख अपना चुकी है। पुलिस इस मामले में श्वेता जैन, अलका दीक्षित, उसके बेटे जयसिंह और महकमे के ही एक पुलिस आरक्षक (कांस्टेबल) सहित कई लोगों को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है। वर्तमान में क्राइम ब्रांच की तकनीकी टीम आरोपियों के जब्त मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, क्लाउड स्टोरेज और ऑडियो-वीडियो क्लिप्स की गहन फॉरेंसिक जांच करा रही है, जिससे जल्द ही इस सिंडिकेट के शिकार हुए कई अन्य बड़े नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।

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