BY
Yoganand Shrivastava
Sardar Aman Khan Appeal पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस्लामाबाद की दमनकारी नीतियों के खिलाफ असंतोष और विरोध प्रदर्शन चरम पर पहुंच गए हैं। क्षेत्र में बिगड़ते हालातों के बीच संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता सरदार अमन खान ने भारत से हस्तक्षेप करने और मानवीय सहायता भेजने की गुहार लगाई है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के अनुसार, पीओके के नागरिक इस समय भोजन, राशन और बुनियादी आवश्यकताओं की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने नई दिल्ली से मदद की अपील की है।
Sardar Aman Khan Appeal ‘एलओसी’ खोलने और भारत की ओर रुख करने की मांग
Sardar Aman Khan Appeal रावलकोट के ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने मांग की कि पुंछ और डोडा सेक्टरों में नियंत्रण रेखा (LoC) को तुरंत खोला जाना चाहिए। उन्होंने जनसमूह से पूछा कि क्या स्थिति और बिगड़ने पर उन्हें एलओसी की तरफ मार्च करना चाहिए, जिस पर वहां मौजूद जनता ने गगनभेदी नारों के साथ सहमति जताई। अमन खान ने पाकिस्तानी हुक्मरानों को चेतावनी दी कि यदि स्थानीय नागरिकों की जायज मांगों का जवाब गोलियों और बल प्रयोग से दिया गया, तो उनके पास दूसरे रास्ते भी खुले हैं।
Sardar Aman Khan Appeal पाकिस्तान ने रोकी राशन और दवाओं की सप्लाई: आरोप
आंदोलन के 26वें दिन सरदार अमन खान ने एक और वीडियो संदेश जारी कर अपनी अपील का दायरा बढ़ाते हुए श्रीनगर, बारामूला, पुंछ, राजौरी, जम्मू, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को भी संबोधित किया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले तीन हफ्तों से पीओके में खाने-पीने की चीजों और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति को जानबूझकर रोक दिया गया है। इस आर्थिक नाकाबंदी के कारण पूरे क्षेत्र में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है।
Sardar Aman Khan Appeal ‘आजादी’ के नारों से गूंजा पीओके, प्रदर्शनकारी घोषित हुए ‘आतंकवादी’
पीओके में भड़का यह जनाक्रोश शुरुआत में महंगाई, बिजली बिलों और खराब शासन व्यवस्था के खिलाफ था, लेकिन अब इसने एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। रैलियों में “कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है” और “हमें आजादी चाहिए” जैसे नारे खुलकर लगाए जा रहे हैं। तनाव तब और बढ़ गया जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने 5 जून को ‘संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी’ पर प्रतिबंध लगा दिया और इस नागरिक संगठन को ‘आतंकवादी’ समूह घोषित कर कार्यकर्ताओं की धरपकड़ शुरू कर दी। इस दमनकारी कार्रवाई ने आग में घी का काम किया है और जनता का गुस्सा और भड़क गया है।





