केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन की अदालत ने हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। उन्हें 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी है। इस फांसी पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब इस गंभीर याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई होगी – यानी फांसी की तारीख से महज दो दिन पहले।
याचिका किसने दायर की और क्या है मांग?
यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता रागेंथ बसंत द्वारा दायर की गई है। सुनवाई के लिए जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका लगाई गई है।
वकील ने दी यह दलील:
- यमन में शरीयत कानून के अनुसार, अगर पीड़ित परिवार ‘ब्लड मनी’ यानी रक्त धन स्वीकार कर लेता है, तो आरोपी को माफ किया जा सकता है।
- ऐसे मामलों में राजनयिक बातचीत से समाधान की संभावना होती है।
संगठन की पहल: सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल
यह याचिका एक नागरिक संगठन “सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल” द्वारा दायर की गई है। यह संगठन निमिषा की रिहाई के लिए राजनयिक माध्यमों से प्रयास कर रहा है और चाहता है कि केंद्र सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए।
हत्या का मामला: कब और कैसे?
- 2011: निमिषा यमन की राजधानी सना में बतौर नर्स काम करने पहुंचीं।
- वहां उन्होंने तलाल महदी नाम के एक यमनी नागरिक के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया।
- लेकिन दोनों के बीच व्यक्तिगत विवाद गहराया और 2017 में तलाल की हत्या हो गई।
- निमिषा और उनके सहयोगी अब्दुल हन्नान को यमन पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- 2018: कोर्ट ने उन्हें हत्या का दोषी माना।
- 2020: यमनी अदालत ने निमिषा को मौत की सजा सुनाई।
- 2024: राष्ट्रपति ने सजा को बरकरार रखा।
- 2025: फांसी की तारीख 16 जुलाई तय की गई है।
समय की कमी बनी चुनौती
पीठ ने भले ही 14 जुलाई को सुनवाई तय की है, लेकिन अधिवक्ता बसंत ने अनुरोध किया है कि सुनवाई आज या कल होनी चाहिए, ताकि भारत सरकार के पास यमन से बातचीत करने का पर्याप्त समय हो।
निष्कर्ष: क्या फांसी रुकेगी?
अब सबकी नजरें 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है और केंद्र सरकार प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करती है, तो यमन में फंसी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की जान बच सकती है।




