33% इलाकों में अब भी नहीं पहुंची पाइपलाइन गैस: जमीन और देरी बना बड़ी बाधा

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33% इलाकों में अब भी नहीं पहुंची पाइपलाइन गैस: जमीन और देरी बना बड़ी बाधा

भारत में पाइपलाइन के जरिए गैस वितरण (Natural Gas Pipeline Network in India) की योजना तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी देश के लगभग 33% क्षेत्र पाइपलाइन से कनेक्ट नहीं हो पाए हैं। इसका असर न केवल उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, बल्कि गैस वितरण कंपनियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अब तक कहां-कहां नहीं पहुंची पाइपलाइन?

  • भारत में 307 सिटी गैस वितरण (CGD) क्षेत्रों में से 91 इलाके अब भी नेचुरल गैस पाइपलाइन से अछूते हैं।
  • इनमें से 44 क्षेत्रों में कंपनियां टैंकरों से गैस भेज रही हैं।
  • जबकि 21 स्थानों पर न तो पाइपलाइन है, न ही टैंकर से सप्लाई की जा रही है।

यह जानकारी पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) की हालिया समीक्षा बैठक में सामने आई।


देरी की बड़ी वजह: जमीन मिलने में अड़चन

गैस कंपनियों ने मीटिंग में बताया कि पाइपलाइन बिछाने के लिए जमीन मिलने में देरी सबसे बड़ी बाधा है

  • सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों ने कई क्षेत्रों में निर्धारित जमीन समय पर नहीं सौंपी
  • ज़मीन मिलने के बाद गैस आपूर्ति के लिए जरूरी उपकरण — जिसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन स्किड्स कहा जाता है — को लगाने और चालू करने में 6 महीने तक का समय लगता है

‘स्किड्स’ क्या होते हैं?

  • ये उपकरण गैस के प्रवाह को मापते हैं,
  • दबाव (pressure) को नियंत्रित करते हैं,
  • और गैस से अवांछित तत्वों को हटाते हैं।

दूसरा कारण: टैप-ऑफ पॉइंट्स की दूरी

कंपनियों का कहना है कि कई मामलों में पाइपलाइन का टैप-ऑफ पॉइंट (जहां से पाइपलाइन को जोड़ा जाता है) लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र से काफी दूर होता है, जिससे पाइपलाइन लाना और भी कठिन हो जाता है।

इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में ‘नॉन-स्टैंडर्ड स्किड्स’ की देरी भी पाइपलाइन प्रोजेक्ट को धीमा कर रही है।


टैंकर से गैस पहुंचाना क्यों है चुनौतीपूर्ण?

  • टैंकर से गैस सप्लाई अस्थायी समाधान है।
  • थोड़ी सी भी दिक्कत होने पर पूरे इलाके में गैस सप्लाई ठप हो सकती है।
  • इसलिए कंपनियों का मानना है कि स्थायी समाधान पाइपलाइन कनेक्शन ही है।

समाधान की दिशा में उठाए जा रहे कदम

बैठक में कई अहम फैसले लिए गए:

  • 44 इलाकों में दिसंबर 2025 तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया।
  • सिटी गैस कंपनियों को निर्देश दिए गए कि:
    • जल्दी जमीन आवंटित करें।
    • स्किड लगाने की योजना तैयार करें और समयसीमा तय करें।
  • गैस पाइपलाइन कंपनियों को सुझाव दिया गया कि:
    • एक लाइसेंस वाले क्षेत्र में एक से अधिक टैप-ऑफ पॉइंट्स उपलब्ध कराएं, ताकि वितरण सुगम हो सके।

तेजी से समाधान नहीं हुआ तो पाइपलाइन गैस का सपना अधूरा रह जाएगा

नेचुरल गैस को हर घर तक पहुंचाने के लिए सरकार और कंपनियां दोनों सक्रिय हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर हो रही देरी, जमीन संबंधी अड़चनें और तकनीकी जटिलताएं इस मिशन को धीमा कर रही हैं।

यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह महत्वाकांक्षी योजना केवल दस्तावेजों में ही सिमट कर रह जाएगी।