BY: Yoganand Shrivastva
MP Intern Doctors भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर तीन दिन से प्रदर्शन कर रहे एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है। सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में करीब 50 फीसदी बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। इसके बाद मौजूदा करीब 14,337 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर लगभग 21,500 रुपये प्रति माह किया जाएगा। यानी इंटर्न डॉक्टरों को करीब 7 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
फैसले के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने सीएम हाउस के पास धरना स्थल खाली कर दिया और सड़क पर यातायात बहाल हो गया। इंटर्न डॉक्टरों ने दो दिन तक आम लोगों को हुई परेशानी के लिए माफी भी मांगी।
तीन दिन के प्रदर्शन के बाद खत्म हुई हड़ताल
MP Intern Doctors स्टाइपेंड बढ़ाने समेत अपनी मांगों को लेकर एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर तीन दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान सीएम हाउस के नजदीक सड़क पर भी आवाजाही प्रभावित हुई थी। सरकार की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बनने के बाद डॉक्टरों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
MP Intern Doctors इंटर्न डॉक्टरों ने फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने धरना स्थल से हटकर सड़क को खाली कर दिया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो गया। डॉक्टरों ने प्रदर्शन के कारण राहगीरों को हुई परेशानी पर खेद भी जताया।
डिप्टी सीएम से मुलाकात के बाद बनी बात
MP Intern Doctors मामले को लेकर इंटर्न डॉक्टरों, एमपीए और जूडा संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी सीएम से मुलाकात की थी। मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर आश्वासन दिया गया। इसके बाद सरकार ने करीब 50 फीसदी बढ़ोतरी के फैसले पर सहमति जताई।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हुई घटना को दुखद और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टर कैंपस में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और उनके साथ हुई कार्रवाई से मुख्यमंत्री भी नाराज थे। मंत्री के मुताबिक, स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर पहले से चर्चा चल रही थी, लेकिन घटना के बाद इस पर जल्द निर्णय लिया गया।
दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, इंटर्न पर कार्रवाई नहीं होगी
MP Intern Doctors प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और लाठीचार्ज की घटना की शुरुआती जांच में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। इनमें आरक्षक कृष्ण दत्त शिवहरे और सहायक उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह यादव शामिल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई पर जूडा और एमटीए संगठनों ने संतोष जताया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन में शामिल एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने से जमीनी स्तर पर काम करने और आम लोगों को समझने का अनुभव मिलता है।
मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव विदेश में होने के बावजूद पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे। उनके निर्देश पर ही स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला लिया गया। नए फैसले के बाद इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड करीब 21,500 रुपये प्रतिमाह हो जाएगा।
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