Mohit Jain
मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया कि अब रिटायरमेंट या ट्रांसफर के बाद सरकारी मकान खाली न करने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई अधिकारी 9 महीने बाद भी मकान में कब्जा बनाए रखता है, तो उससे 30 गुना किराया वसूला जाएगा। साथ ही, आवश्यक होने पर बेदखली की कार्रवाई भी की जाएगी।
नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु

- ट्रांसफर या रिटायरमेंट के बाद अधिकारी 6 महीने तक सामान्य किराए पर रह सकता है।
- अतिरिक्त 3 महीने की अवधि भी सामान्य किराए पर संभव होगी।
- 9 महीने बाद भी कब्जा जारी रहा तो अगले तीन महीने तक 10 गुना किराया देना होगा।
- इसके बाद यदि मकान नहीं छोड़ा, तो 30 गुना किराया जुर्माने के रूप में वसूला जाएगा।
कैबिनेट में उठे सवाल, मंत्रियों ने जताई नाराजगी
बैठक के दौरान मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, नारायण सिंह कुशवाह और लखन पटेल ने सवाल उठाए कि मंत्रियों, विधायकों और सांसदों से तो एक दिन में आवास खाली कराया जाता है, जबकि अधिकारियों-कर्मचारियों को 6 महीने का वक्त दिया जाता है। उन्होंने कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
इस पर सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि संशोधित नियम अब उन सभी पर लागू होंगे जिन्हें शासकीय आवास आवंटित किए गए हैं।
भास्कर इनसाइट
मंत्रियों ने तंज करते हुए कहा, “हमसे तो पहले दिन ही खाली करा लिया जाता है, फिर अफसरों को इतनी मोहलत क्यों?”
सरकार का यह कदम लंबे समय से सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए बैठे अफसरों के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है।
राज्य सरकार के इस नए नियम से अब सरकारी आवासों के दुरुपयोग पर लगाम लग सकेगी। यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।





