Women Reservation Bill : जनता के बीच जाएगी BJP, विपक्ष भी देगा सफाई,नारी शक्ति की लड़ाई, देशभर में सियासी पारा हाई
Women Reservation Bill : देश में इस वक्त जिस मुद्दे की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो है महिला आरक्षण बिल। संसद में जिस 33 प्रतिशत महिला आरक्षण बिल को लेकर घमासान मचा रहा, अब उसे लेकर सड़क पर संग्राम दिखने वाला है। संसद में 21 घंटे चली चर्चा और सियासी आरोप प्रत्यारोप के बीच ‘नारी शक्ति वंदन’ के नाम से चर्चित यह विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। और महिलाओं के 33% आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है। पिछले 12 साल में ये पहली बार है जब सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सरकार की ओर से पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक सदन में गिरा हो। इसकी सबसे बड़ी वजह संसदीय लोकसभा क्षेत्रों की संख्या फिर से निर्धारित करने के लिए लाया जा रहा परिसीमन विधेयक भी इसके साथ जुड़ा होना माना जा रहा है। संसद के भीतर जहां इस बिल को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, वहीं बाहर अब विरोध और समर्थन की आवाजें तेज हो रही हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज और दोनों ही पक्ष अपने-अपने तरीके से जनता के बीच इस मुद्दे को भुनाने में जुट गए हैं।राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में देशभर में प्रदर्शन, रैलियां और जनसभाएं इस मुद्दे को और गरमा सकती हैं। महिला संगठनों ने भी सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के संकेत दिए हैं, जिससे यह साफ है कि अब यह लड़ाई संसद से निकलकर जनता के बीच पहुंच चुकी है। यही वजह है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।ऐसे में सवाल यही है कि क्या महिला आरक्षण का सपना अब भी अधूरा रहेगा, या नारी के लिए शक्ति की लड़ाई का कोई नया रास्ता निकलेगा ? इसी मुद्दे पर करेंगे चर्चा, लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।।
Women Reservation Bill : लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ के गिरने के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले सत्ता पक्ष ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने विपक्षी दलों को ‘महिला विरोधी’ और ‘विकास विरोधी’ करार दिया है। बीजेपी ने विपक्ष पर ऐतिहासिक महिला आरक्षण बिल को विफल करने का आरोप लगाते हुए इसे महिलाओं के साथ ‘विश्वासघात’ बताया है। अब इस मुद्दे पर बीजेपी आक्रामक रुख अपनाते हुए जनता के बीच जाएगी। बीजेपी ने देश भर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है, जिससे विपक्ष के इस विरोधी कदम का पर्दाफाश किया जा सके। आज देशभर में बीजेपी के मुख्यमंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे इतिहास का काला अध्याय बताया और महिला विरोधी नीतियों के लिए कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष को महिला विरोधी बताया और कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती कि महिलाओं को उनका अधिकार औऱ हक मिले, उन्होंने कहा कि बहनों का हक छीनना कांग्रेस की परंपरा है, देश इनको कभी माफ नहीं करेगा। मोहन यादव ने विपक्षी दलों को घेरने के लिए 10 दिनों का राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की, जिसमें कांग्रेस के महिला विरोधी रुख को उजागर किया जाएगा। तो वहीं सीएम योगी ने भी विपक्ष पर करारा हमला बोला कहा कि इंडी गठबंधन ने महिला आरक्षण का विरोध कर घोर महापाप किया है, देश की महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। तो वहीं सीएम विष्णुदेव साय ने विपक्ष द्वारा बिल गिराने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कांग्रेस पर फूट डालो, राज करो की राजनीति का आरोप लगाया।
Women Reservation Bill : अब महिला आरक्षण बिल पास न होने पर बीजेपी नेताओं का कहना है कि संसद में बहुमत न होने के कारण बिल पास नहीं हुआ, जो कांग्रेस और विरोधी दलों की महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश थी। लेकिन कांग्रेस और विपक्ष का तर्क कुछ और ही है। वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिल को सही तरीके से पेश नहीं किया गया और इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा को नजरअंदाज किया गया है। विपक्ष ने इसे अधूरा और चुनावी जुमला करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि 543 में महिला आरक्षण कीजिए हम सब आपके साथ हैं, प्रधानमंत्री खुद महिलाओं को आरक्षण देने में रोड़ा बन रहे हैं। तो वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि झगड़ा साजिश और षड़यंत्र का है। महिलाओं का हक अधिकार भाजपा ही छीन रही है और आरोप हम पर हैं।
Women Reservation Bill :अब राजनीति में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की लड़ाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं। संसद के बाद नारी के हक और अधिकार की लड़ाई अब सड़क पर लड़ी जाएगी। लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन सरकार ने स्पष्ट किया कि आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना अनिवार्य था जिससे महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके, लेकिन विपक्ष ने इस पर विरोध जताया। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार आरक्षण के नाम पर परिसीमन के बहाने से अपनी राजनीतिक योजना को आगे बढ़ा रही है, और उन्होंने कानून के तत्काल कार्यान्वयन की मांग की है। बहरहाल अब महिला आरक्षण बिल का गिरना सिर्फ एक विधायी असफलता नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि देश में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा अब भी राजनीतिक खींचतान में उलझा हुआ है। ऐसे में ‘नारी शक्ति वंदन’ का सपना कब साकार होगा, यह अब आने वाले सियासी समीकरण तय करेंगे।

