नीला ड्रम, मीडिया और महिलाएं: अपराध किसका और चर्चा किसकी?

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नीले ड्रम का डर

नीले ड्रम का डर: पर क्या डर की पूरी तस्वीर है?

हाल ही में नीले ड्रम में मिले शवों की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी न्यूज़ तक – हर जगह इसी पर चर्चा है। लेकिन क्या सचमुच सिर्फ ये घटनाएं हमारे समाज की सबसे बड़ी चिंता हैं?

इन ड्रमों की कहानियां जितनी डरावनी हैं, उतनी ही भयावह वो हज़ारों घटनाएं भी हैं जो रोज़ महिलाओं के खिलाफ होती हैं, पर कभी सुर्खियां नहीं बन पातीं।


मीडिया में हाइप बनाम आंकड़ों की हकीकत

जब एक महिला पति की हत्या करती है, वो खबर वायरल हो जाती है। वहीं जब लाखों महिलाएं घरेलू हिंसा झेलती हैं, तो वो ‘नॉर्मल’ मान लिया जाता है।

यह वही समाज है जो पुरुष अपराध को ‘क्राइम’ और महिला अपराध को ‘चौंकाने वाला’ बताता है। आइए, अब नजर डालते हैं कुछ ठोस आंकड़ों पर।


2025 की रिपोर्ट: महिलाओं पर अपराधों का असली चेहरा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट से मिलती हैं ये प्रमुख जानकारियां:

  • कुल महिला विरोधी अपराध (2025): 4.01 लाख
    • 31% – पति या ससुराल वालों द्वारा की गई क्रूरता
    • 20% – छेड़खानी, अश्लील टिप्पणी, अभद्र व्यवहार
    • 17% – अपहरण
    • 8.7% – बलात्कार
  • राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के मुताबिक:
    • जनवरी-जून 2025 में 1500+ घरेलू हिंसा की शिकायतें दर्ज हुईं
    • सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश (3900), फिर दिल्ली (688)
  • NFHS (2019-21):
    • 32% शादीशुदा महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार
    • पर सिर्फ 6.3% ने पुलिस में रिपोर्ट की

भारत में महिलाओं की रिपोर्टिंग क्यों कम है?

  • समाज का दबाव: “घर की बात है, बाहर क्यों बताओ?”
  • ग्रामीण इलाकों में पुलिस या अदालत तक पहुंच की कमी
  • न्यायिक प्रक्रिया धीमी और महंगी
  • पति द्वारा जबरन संबंध (Marital Rape) अब भी कानूनन अपराध नहीं

नतीजा: लाखों महिलाएं हिंसा झेलती हैं, पर चुप रहती हैं।


डिजिटल अपराधों में भी महिलाएं असुरक्षित

2025 में डिजिटल अपराधों में 27% की वृद्धि हुई:

  • डीपफेक वीडियो
  • डिजिटल स्टॉकिंग
  • साइबरब्लैकमेल

हालांकि इनकी रिपोर्टिंग बेहद कम है। सरकार ने 112, 181 जैसी हेल्पलाइन और फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत की है, लेकिन स्टाफ की कमी और जागरूकता की कमी प्रयासों को कमजोर बनाती है।


5 राज्य जहाँ होते हैं सबसे ज़्यादा महिला अपराध

  1. उत्तर प्रदेश – 65,743 मामले (2022)
  2. दिल्ली – प्रति लाख महिलाओं पर क्राइम रेट 144.4 (नेशनल एवरेज: 66.4)
  3. महाराष्ट्र
  4. पश्चिम बंगाल
  5. मध्य प्रदेश

जब महिलाएं करती हैं अपराध: समाज का दोहरा व्यवहार

अब नजर डालते हैं कुछ चर्चित मामलों पर:

  • सोनम रघुवंशी (मध्यप्रदेश): शादी के 4 दिन बाद पति की हत्या
  • ममता देवी (बिहार): प्रेमी के साथ मिलकर गोली मारी
  • मंजू देवी (झारखंड): पति की गला घोंटकर हत्या, शव तालाब में
  • शिवानी (बिजनौर): नींद की गोली के बाद गला दबाकर हत्या
  • आमना (मैनपुरी): पति के खाने में जहर, फिर प्रेमी ने हत्या की

इन मामलों में मीडिया कवरेज हाई और पुलिस की कार्रवाई फास्ट रही।


महिला अपराधी पर समाज की असामान्य प्रतिक्रिया क्यों?

“जब कोई महिला अपराध करती है, वह सिर्फ अपराध नहीं करती – वह समाज की पारंपरिक सोच को भी तोड़ती है।”

  • प्रो. जीएस वाजपेयी, वाइस चांसलर – नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी

समाज में महिलाओं से अपेक्षा होती है कि वे आज्ञाकारी, संवेदनशील और देखभाल करने वाली हों। ऐसे में अपराध करने वाली महिला को दोहरा अपराधी माना जाता है – कानूनी और सामाजिक रूप से।


महिला अपराध सुर्खियों में क्यों, लेकिन महिला पीड़िता नहीं?

  • महिला द्वारा अपराध → “चौंकाने वाली खबर”, सोशल मीडिया वायरल
  • महिला पर अपराध → “घर की बात”, मीडिया में जगह नहीं

जबकि महिलाओं द्वारा अपराध की संख्या बहुत कम है, फिर भी समाज उन्हें ज़्यादा तीव्रता से देखता है।


आंकड़े क्या कहते हैं?

  • NCRB महिलाओं द्वारा किए गए अपराधों की अलग से ट्रैकिंग नहीं करता
  • महिलाओं पर हो रहे अपराधों की संख्या लाखों में
  • महिला अपराधी को “जेंडर” के साथ जोड़ा जाता है
  • पुरुष अपराधी को सिर्फ “अपराधी” माना जाता है

अब समय है सोच बदलने का

  • महिला हो या पुरुष – अपराधी को अपराधी माना जाए
  • मीडिया को चाहिए कि वह सिर्फ सनसनी नहीं, संतुलन दिखाए
  • न्याय प्रक्रिया तेज़ और निष्पक्ष होनी चाहिए
  • घरेलू हिंसा को सामान्य या ‘घरेलू मामला’ कहना बंद हो
  • महिला अपराधियों पर दोगुनी कठोरता से नहीं, बराबरी के आधार पर चर्चा हो

आपकी राय?

क्या आप भी मानते हैं कि महिला अपराध बनाम महिला पीड़िता के मामलों में समाज का नजरिया पक्षपाती है?
कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें।

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