Lucknow उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों (पंचायत चुनावों) में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को हरी झंडी दे दी गई। यह कदम उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए उठाया गया है। बैठक में कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए गए, और सभी पर कैबिनेट ने अपनी सर्वसम्मति से मुहर लगा दी।
Lucknow सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का होगा विस्तृत अध्ययन
Lucknow कैबिनेट के फैसलों की आधिकारिक जानकारी देते हुए राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि यह नया आयोग प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगा।
- अध्ययन का दायरा: आयोग पंचायतों में ओबीसी वर्ग की जनसंख्या, उनके सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी का समकालीन व अनुभवजन्य (Empirical) अध्ययन करेगा।
- आरक्षण का निर्धारण: इस विस्तृत सर्वे और अध्ययन के आधार पर ही आयोग निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगा।
- समय सीमा: इस समर्पित आयोग का कार्यकाल सामान्य तौर पर छह महीने का तय किया गया है, जिसके भीतर इसे अपनी रिपोर्ट पूरी करनी होगी।
Lucknow हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज होंगे आयोग के अध्यक्ष
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इस विशेष समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग में कुल पाँच सदस्य शामिल होंगे, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाएगा।
- नेतृत्व: आयोग की कमान उच्च न्यायालय (High Court) के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के हाथों में होगी, जिन्हें इसका अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा।
- योग्यता: आयोग में उन्हीं विशेषज्ञों और गणमान्य व्यक्तियों को जगह दी जाएगी, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े कानूनी, सामाजिक और जमीनी मामलों का गहरा ज्ञान और लंबा अनुभव हो।
Lucknow अधिकतम 27 फीसदी आरक्षण की सीमा रहेगी बरकरार
वित्त मंत्री ने साफ किया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत ही आरक्षण व्यवस्था लागू रहेगी।
“संविधान के अनुच्छेद 243-घ के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए पंचायतों में आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान है। नए नियमों के तहत भी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण की अधिकतम सीमा कुल सीटों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।”
यदि किसी क्षेत्र में पिछड़े वर्ग की जनसंख्या के अद्यतन (Updated) आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तो आयोग वहां विशेष सर्वेक्षण के जरिए डेटा जुटाएगा। इसी समर्पित आयोग की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही उत्तर प्रदेश के आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण की रूपरेखा तैयार की जाएगी।





