प्रयागराज महाकुंभ में श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े की पेशवाई (छावनी प्रवेश) निकाली गई। पेशवाई में 500 से ज्यादा साधु-संत शामिल हुए। जो शिव आराधना के साथ गुरुबाणी का पाठ करते हुए चल रहे थे। पेशवाई मुंशी राम बगिया, मुठ्ठीगंज से रवाना हुई। इस दौरान जगह-जगह फूल बरसा कर साधु-संतों का स्वागत किया गया। लोग साधुओं के साथ सेल्फी लेते दिखे। महाकुंभ मेला क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद संत संगम की रेती पर जप-तप करेंगे। 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ में करीब 50 करोड़ लोग आएंगे।
श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा करीब 111 साल पुराना है
श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा करीब 111 साल पुराना है। इसका रजिस्ट्रेशन 1913 में हुआ था। अखाड़ों के महंत बताते हैं, बड़ा उदासीन अखाड़े के संतों से वैचारिक मतभिन्नता के बाद महात्मा सूरदास जी की प्रेरणा से एक अलग अखाड़ा स्थापित किया गया। जिसे श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा (हरिद्वार) नाम दिया गया। इसका प्रमुख केंद्र हरिद्वार के कनखल में है। यह अखाड़ा करीब 111 वर्ष पुराना है। वर्ष 1913 में इस अखाड़े का रजिस्ट्रेशन हुआ था। अखाड़ों के महंतों के अनुसार- बड़ा उदासीन अखाड़े के संतों से वैचारिक मतभिन्नता के बाद महात्मा सूरदास जी की प्रेरणा से एक अलग अखाड़ा स्थापित किया गया।इसी अलग अखाड़े को श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा (हरिद्वार) नाम दिया गया। इसका प्रमुख केंद्र हरिद्वार के कनखल में है।






