Kamal Akhtar Resigns Chief Whip: यूपी में सपा को बड़ा झटका! मुख्य सचेतक कमाल अख़्तर का इस्तीफा, सांसद रुचि वीरा से विवाद के बाद बढ़ी सियासी रार

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Kamal Akhtar Resigns Chief Whip

Kamal Akhtar Resigns Chief Whip उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर मची अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। मुरादाबाद जनपद की कांठ विधानसभा सीट से कद्दावर सपा विधायक कमाल अख़्तर ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद से इस्तीफा दे दिया है। इस चौंकाने वाले कदम के बाद समाजवादी पार्टी के खेमे में सियासी भूचाल आ गया है और लखनऊ से लेकर मुरादाबाद तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

Kamal Akhtar Resigns Chief Whip सांसद रुचि वीरा से चल रही थी ‘शीतयुद्ध’, आलाकमान की बैठक भी रही बेअसर

Kamal Akhtar Resigns Chief Whip राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख़्तर के बीच पिछले काफी समय से वर्चस्व की जंग चल रही थी। दोनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों को सुलझाने के लिए हाल ही में लखनऊ में पार्टी आलाकमान (अखिलेश यादव) ने एक हाई-लेवल मीटिंग भी बुलाई थी। इस बैठक में दोनों दिग्गजों को साथ बिठाकर विवाद खत्म करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कमाल अख़्तर के इस इस्तीफे ने साफ कर दिया है कि भीतर सुलग रही चिंगारी अब बड़ी आग बन चुकी है।

Kamal Akhtar Resigns Chief Whip चुनाव से ठीक पहले अंदरूनी गुटबाजी बनी सपा की सिरदर्दी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक हैं, ऐसे में मुख्य सचेतक जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पद से कमाल अख़्तर का हटना पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

  • अधिकारिक पुष्टि का इंतजार: हालांकि, कमाल अख़्तर के इस इस्तीफे के पीछे के सटीक कारणों पर समाजवादी पार्टी या खुद विधायक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
  • नेताओं की चुप्पी: इस समय कमाल अख़्तर लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं, जबकि सांसद रुचि वीरा भी मुरादाबाद से बाहर हैं। दोनों ही नेताओं से संपर्क न हो पाने के कारण अभी तक उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है।

क्यों अहम है यह इस्तीफा? विधानमंडल में ‘मुख्य सचेतक’ का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है, जो सदन के भीतर पार्टी विधायकों में अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने का काम करता है। चुनाव के मुहाने पर इतने बड़े पद से किसी कद्दावर मुस्लिम चेहरे का इस्तीफा देना पश्चिमी यूपी में सपा के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के आधिकारिक स्टैंड और खुद अखिलेश यादव के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही साफ होगा कि डैमेज कंट्रोल के लिए सपा क्या रणनीति अपनाती है।

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