by: vijay yadav
Jaguar Land Rover Jobs : लंदन। ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने कर्मचारियों की संख्या कम करने की योजना की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी में अगले दो वर्षों के दौरान करीब 4,000 नौकरियां खत्म होने का खतरा है। हालांकि, JLR ने अभी तक नौकरियों में कटौती की निश्चित संख्या की पुष्टि नहीं की है।
कंपनी बढ़ती लागत, कमजोर बिक्री और अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के दबाव से जूझ रही है। ब्रिटेन और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद JLR के वाहनों पर अमेरिकी बाजार में टैरिफ की दर घटकर 10 प्रतिशत हो गई है, लेकिन इसका असर कंपनी पर अभी भी बना हुआ है। उत्तरी अमेरिका JLR का सबसे बड़ा बाजार है।
कंपनी की मुश्किलें पिछले साल हुए एक बड़े साइबर हमले के बाद और बढ़ गई थीं। इस हमले के कारण JLR को कई सप्ताह तक उत्पादन रोकना पड़ा था।
Jaguar Land Rover Jobs : कंपनी को 1.7 अरब पाउंड की बचत का लक्ष्य
जून में समाप्त हुई तिमाही में JLR का राजस्व करीब 10 प्रतिशत घट गया। वहीं कंपनी का टैक्स से पहले का मुनाफा दो-तिहाई से ज्यादा गिरकर 10.9 करोड़ पाउंड रह गया।
रिपोर्टों के अनुसार कंपनी के भारतीय मालिक टाटा मोटर्स की ओर से लागत घटाने का दबाव है। JLR अगले दो वर्षों में करीब 1.7 अरब पाउंड की बचत करना चाहती है। इसके साथ ही कंपनी अपने सालाना ब्रेक-ईवन स्तर को घटाकर करीब 3 लाख वाहनों तक लाने की कोशिश कर रही है।
JLR ने कहा है कि बदलते वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप कंपनी को खुद को ढालना होगा। इसके तहत कंपनी ने वेतनभोगी और प्रबंधन स्तर के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति/नौकरी छोड़ने की योजना शुरू की है।
Jaguar Land Rover Jobs : ब्रिटेन में करीब 34 हजार कर्मचारियों पर असर
JLR ब्रिटेन में सीधे तौर पर करीब 34,000 लोगों को रोजगार देती है। इसके अलावा कंपनी से जुड़े ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन क्षेत्र में लगभग 1.20 लाख नौकरियां निर्भर हैं। ऐसे में कंपनी की लागत कटौती का असर व्यापक स्तर पर पड़ने की आशंका है।
यूरोप की ऑटोमोबाइल कंपनियां भी इस समय कमजोर मांग, बढ़ती उत्पादन लागत और चीन की कम कीमत वाली कार कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं।

जर्मनी की फॉक्सवैगन भी बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती की योजना बना चुकी है। कंपनी ने 2030 तक करीब 1 लाख कर्मचारियों की संख्या कम करने की योजना बनाई है। उसकी लग्जरी कार इकाई पोर्श भी 2035 तक करीब 5,000 पदों को खत्म करने की तैयारी में है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यूरोपीय ऑटो उद्योग के सामने अमेरिका के टैरिफ, चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ऊंची ऊर्जा लागत जैसी कई चुनौतियां एक साथ खड़ी हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद यूरोप में सस्ती रूसी पाइपलाइन गैस की उपलब्धता घटने से भी जर्मनी जैसे प्रमुख औद्योगिक देशों की उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ा है।
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