Report: Prem Shrivastva
Sarna Dharma Code जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में रविवार को माझी पारगाना माहाल, कोल्हान प्रमंडल की ओर से ‘मिद माहारी धोरोम सेनेलेद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में आदिवासी धर्म, संस्कृति, रूढ़ि-परंपराओं और पारंपरिक व्यवस्थाओं के संरक्षण पर मंथन किया गया।

युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना जरूरी
Sarna Dharma Code कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माझी बाबा दुर्गा मुर्मू ने कहा कि वर्तमान दौर में आदिवासी समाज की युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित हो रही है। ऐसे में युवाओं को उनकी मूल आदिवासी सभ्यता, संस्कृति, धर्म और परंपराओं से जोड़ना समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, जिसे सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।

सरना धर्म कोड की मांग फिर उठाई
Sarna Dharma Code दुर्गा मुर्मू ने आदिवासी समाज के लिए अलग सरना धर्म कोड की मांग को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जब आदिवासी समाज की अपनी धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान है, तो उसे अलग धार्मिक पहचान के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से लंबे समय से चली आ रही सरना धर्म कोड की मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
जाहेर बोंगा और पारंपरिक व्यवस्था के संरक्षण पर चर्चा
Sarna Dharma Code कार्यक्रम में आदिवासी धर्म और संस्कृति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। जाहेर बोंगा, पारंपरिक धार्मिक स्थलों के संरक्षण और रूढ़ि-परंपराओं को मजबूत करने पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में आदिवासी पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के माझी, पारगाना बाबा और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।


