BY
Yoganand Shrivastava
Jagadguru Swami Chakrapani यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम स्थित नानक दरबार सचखंड में आयोजित संत संसद में जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने विश्व शांति, मानवता और सामाजिक जागरूकता के लिए ‘6 नकार’ का सूत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। संत संसद में उपस्थित संतों और धर्माचार्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

Jagadguru Swami Chakrapani स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने नशामुक्ति, नकारात्मकता के विरोध, परमाणु हथियारों के खतरे, नाम जप के महत्व, नैतिक शिक्षा की पुनर्स्थापना और नारी सम्मान को मानव समाज के लिए आवश्यक संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को अपनाकर ही विश्व में शांति, सद्भाव और संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
Jagadguru Swami Chakrapani संतों ने मानवता और संस्कृति संरक्षण पर रखा जोर
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संतों और धर्माचार्यों ने मानवता की सेवा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है।

इस अवसर पर कई संतों ने युवाओं में नैतिक मूल्यों के विकास, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही समाज में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए संत समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।
Jagadguru Swami Chakrapani विश्व शांति और मानव कल्याण का दिया संदेश
अपने संबोधन में स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सरबत दा भला’ की भावना आज भी विश्व को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी लोगों से मानवता, सद्भाव और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर संतों ने विश्व शांति, मानव कल्याण और सामाजिक सद्भाव के लिए सामूहिक संकल्प लिया। भजन, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक संदेशों के साथ आयोजित यह संत संसद श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुई।



