Santosh Choubey Honorary Doctorate: भोपाल के शिक्षाविद, साहित्यकार और सामाजिक उद्यमी संतोष चौबे को शिक्षा, विज्ञान संचार, सामाजिक उद्यमिता, साहित्य और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। 21 सितंबर 2026 को झारखंड के गढ़वा स्थित बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय की ओर से संतोष चौबे और गौतम जैन को मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी गई।

Santosh Choubey Honorary Doctorate: गढ़वा में मिला सम्मान
Santosh Choubey Honorary Doctorate: बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शिक्षा और सामाजिक योगदान को विशेष महत्व दिया गया। इसी कार्यक्रम में संतोष चौबे को उनकी विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालीन भूमिका के लिए मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी ने शिक्षा, साहित्य, विज्ञान संचार, सामाजिक उद्यमिता और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान को इस सम्मान का आधार बताया। समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार भी मौजूद रहे और विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
Santosh Choubey Honorary Doctorate: इंजीनियरिंग से शिक्षा और तकनीक तक का सफर
Santosh Choubey Honorary Doctorate: 22 सितंबर 1955 को खंडवा में जन्मे संतोष चौबे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अपने करियर की शुरुआत तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्र से की। लेकिन उनका काम केवल पेशेवर जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तकनीक को आम लोगों, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के युवाओं तक पहुंचाने की दिशा में काम किया।
वर्ष 1985 में उन्होंने ऑल इंडिया सोसायटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी यानी AISECT की स्थापना की। उस दौर में कंप्यूटर तकनीक आम लोगों के लिए अपेक्षाकृत नई थी। AISECT के माध्यम से शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
Santosh Choubey Honorary Doctorate: हिंदी में विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा
Santosh Choubey Honorary Doctorate: संतोष चौबे ने तकनीकी विषयों को हिंदी में सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया। उनकी पुस्तक ‘कंप्यूटर: एक परिचय’ को हिंदी में कंप्यूटर जागरूकता और तकनीकी समझ विकसित करने वाली महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिना जाता है।
उन्होंने विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए विज्ञान संचार के विभिन्न माध्यमों का भी इस्तेमाल किया। साहित्य और विज्ञान के बीच संवाद स्थापित करना उनके काम की एक खास विशेषता रही है। उनके प्रयासों में शिक्षा को तकनीक, कौशल, नवाचार और सामाजिक सशक्तीकरण से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
Santosh Choubey Honorary Doctorate: साहित्य में भी बनाई अलग पहचान
Santosh Choubey Honorary Doctorate: तकनीक और शिक्षा के साथ संतोष चौबे ने साहित्य को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। वे कवि, कथाकार और उपन्यासकार के रूप में सक्रिय रहे हैं। उनके कई कथा संग्रह, उपन्यास और कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
उनके चर्चित उपन्यासों में ‘राग केदार’, ‘क्या पता कामरेड मोहन’, ‘जल तरंग’ और ‘सपनों की दुनिया में ब्लैक होल’ शामिल हैं। उनके साहित्यिक लेखन में समकालीन जीवन, समाज, विज्ञान और मानवीय अनुभवों के विभिन्न पहलुओं को जगह मिली है।
‘जल तरंग’ के लिए उन्हें शैलेश मटियानी पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय वैली ऑफ वर्ड्स पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। उनकी साहित्यिक गतिविधियां लेखन के साथ-साथ संपादन और साहित्यिक दस्तावेजीकरण तक फैली हुई हैं।
Santosh Choubey Honorary Doctorate: ‘विश्व रंग’ से हिंदी को वैश्विक मंच
Santosh Choubey Honorary Doctorate: हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की दिशा में ‘विश्व रंग’ भी उनकी महत्वपूर्ण पहल रही है। वर्ष 2019 में भोपाल से शुरू हुआ यह आयोजन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हिंदी लेखकों, साहित्यकारों और हिंदी प्रेमियों को जोड़ने के उद्देश्य से आगे बढ़ा।
हिंदी के वैश्विक विस्तार को लेकर चौबे तकनीक के इस्तेमाल और विदेशों में हिंदी शिक्षण को आसान बनाने पर भी जोर देते रहे हैं। साहित्यिक मंचों पर उन्होंने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय और उपयोगी भाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर विचार रखे हैं।
Santosh Choubey Honorary Doctorate: शिक्षा और साहित्य के साथ मिले कई सम्मान
Santosh Choubey Honorary Doctorate: संतोष चौबे के काम को शिक्षा, सामाजिक उद्यमिता, विज्ञान संचार और साहित्य के क्षेत्र में अलग-अलग स्तरों पर सम्मान मिला है। उनके कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पहचान मिली है।
AISECT के माध्यम से उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया। उनके मार्गदर्शन में कई उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास की जानकारी भी उपलब्ध है। साहित्य और हिंदी के क्षेत्र में उनकी सक्रियता के साथ उन्हें विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक सम्मानों से भी नवाजा गया है।
Santosh Choubey Honorary Doctorate: मानद डॉक्टरेट उनके लंबे सार्वजनिक और रचनात्मक सफर में एक और उपलब्धि जुड़ने जैसा है। इंजीनियरिंग और तकनीक से शुरू हुई उनकी पेशेवर यात्रा शिक्षा, विज्ञान संचार, सामाजिक उद्यमिता और साहित्य तक पहुंची। अब हिंदी और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच देने की उनकी कोशिश भी इसी यात्रा का हिस्सा है।


