Raipur PDS Investigation: छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक सब्सिडी वाला राशन पहुंचाने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS की व्यवस्था को लेकर रायपुर में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। स्वदेश न्यूज़ को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राशन दुकानों की पड़ताल की गई। इस दौरान कुछ दुकानों पर मौके का स्टॉक और ऑनलाइन रिकॉर्ड अलग-अलग नजर आया।
Raipur PDS Investigation: पड़ताल के दौरान कुछ हितग्राहियों ने राशन नहीं मिलने, सर्वर की समस्या, मशीन खराब होने और स्टॉक उपलब्ध नहीं होने जैसी परेशानियां बताईं। वहीं कुछ लोगों ने चावल के बदले पैसे दिए जाने और राशन आगे भेजे जाने की बातें भी कहीं। इन दावों की पुष्टि के लिए खाद्य विभाग और प्रशासन का पक्ष भी सामने रखा गया।
Raipur PDS Investigation: मोवा की राशन दुकानों में रिकॉर्ड और मौके पर अलग तस्वीर
Raipur PDS Investigation: स्वदेश न्यूज़ की टीम रायपुर के मोवा इलाके में अवंति बाई लोधी चौक के पास स्थित राशन दुकान क्रमांक 1071 और 1171 पर पहुंची। दोपहर करीब 12 बजे यहां कुछ हितग्राही राशन लेने के लिए पहुंचे हुए थे।
Raipur PDS Investigation: मौके पर दुकान के अंदर चावल का स्टॉक बेहद कम या लगभग नहीं दिखाई दिया। दुकान संचालक की ओर से चावल नहीं होने और जल्द आने की बात कही गई। कुछ लोग शक्कर लेने भी पहुंचे, लेकिन उन्हें मशीन खराब होने की जानकारी दी गई।
Raipur PDS Investigation: इसके बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दुकानों के रिकॉर्ड में करीब 10 टन चावल दर्ज था। इससे सवाल उठा कि यदि रिकॉर्ड में इतना स्टॉक मौजूद है तो मौके पर गोदाम में चावल कहां है।
Raipur PDS Investigation: सर्वर और स्टॉक की समस्या से परेशान हितग्राही
Raipur PDS Investigation: पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ हितग्राहियों को सर्वर स्लो होने की बात कहकर वापस भेजे जाने की स्थिति बनी। कुछ जगहों पर स्टॉक उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई।
Raipur PDS Investigation: इसके बाद टीम मधु पिल्लई स्कूल परिसर स्थित एक अन्य राशन दुकान तक पहुंची। यहां भी राशन लेने के लिए लोगों की भीड़ दिखाई दी। दुकान के अंदर राशन तौलने की मशीन मौजूद थी, लेकिन चावल की बोरियां नजर नहीं आईं।
Raipur PDS Investigation: बातचीत के दौरान कुछ हितग्राहियों ने दावा किया कि बार-बार राशन दुकान के चक्कर लगाने से परेशान होकर वे चावल के बदले पैसे लेना पसंद करते हैं। कुछ लोगों ने राशन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें बताईं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
Raipur PDS Investigation: क्या चावल के बदले पैसे देना नियमों के खिलाफ?
Raipur PDS Investigation: राशन के बदले पैसे दिए जाने की बात सामने आने के बाद खाद्य विभाग से नियमों को लेकर जानकारी ली गई। रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा के मुताबिक सरकारी राशन के चावल की खरीद-बिक्री नियमों के खिलाफ है और ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है।
Raipur PDS Investigation: विभाग के इस बयान के बाद सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि किसी हितग्राही को चावल के बदले पैसे दिए जाने की बात सामने आती है, तो इसकी जांच किस स्तर तक की जाती है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
Raipur PDS Investigation: दुकानों के ताले खुले, POS रिकॉर्ड से हुआ स्टॉक मिलान
Raipur PDS Investigation: पड़ताल के दौरान कुछ राशन दुकान संचालकों के दुकान बंद करके चले जाने की स्थिति भी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया और दुकानों के ताले खुलवाए गए।
Raipur PDS Investigation: अधिकारियों की मौजूदगी में POS मशीन शुरू कराई गई और ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक का मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक से मिलान किया गया। प्रशासन की जांच में 10 हजार किलो से ज्यादा चावल का अंतर सामने आने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। इसके बाद संबंधित समूह के खिलाफ प्रकरण बनाए जाने की जानकारी दी गई।
Raipur PDS Investigation: एक दुकान में कम तो दूसरी में ज्यादा स्टॉक का सवाल
Raipur PDS Investigation: जांच के दौरान स्टॉक को लेकर अलग-अलग स्थिति भी सामने आई। एक तरफ कुछ दुकानों में रिकॉर्ड के मुकाबले चावल कम मिला, वहीं दूसरी दुकान में रिकॉर्ड से ज्यादा चावल पाए जाने की स्थिति बताई गई।
Raipur PDS Investigation: यही अंतर PDS की स्टॉक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। POS मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक गोदाम में मौजूद स्टॉक का नियमित मिलान किस स्तर पर होता है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Raipur PDS Investigation: सवाल सिर्फ दुकानदारों पर कार्रवाई का नहीं
Raipur PDS Investigation: इस पूरे मामले में सवाल केवल राशन दुकान संचालकों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह भी है कि राशन की सप्लाई और वितरण व्यवस्था में स्टॉक की निगरानी किस तरह की जाती है।
Raipur PDS Investigation: भौतिक सत्यापन कितनी नियमितता से होता है? POS रिकॉर्ड और गोदाम के वास्तविक स्टॉक का मिलान कौन करता है? यदि कुछ दुकानों की जांच में ही 10 हजार किलो से अधिक का अंतर सामने आया है, तो क्या अन्य राशन दुकानों की भी व्यापक जांच की जरूरत है? इन सवालों का जवाब विस्तृत जांच और आधिकारिक आंकड़ों से ही सामने आएगा।
Raipur PDS Investigation: गरीब के हक के चावल का पूरा हिसाब जरूरी
Raipur PDS Investigation: PDS का उद्देश्य पात्र परिवारों तक सरकारी सहायता से मिलने वाला खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर स्टॉक और रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि अंतर किस वजह से हुआ।
Raipur PDS Investigation: जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि चावल दुकान से बाहर कैसे गया, सप्लाई चेन में उसकी आवाजाही कैसे हुई और स्टॉक में अंतर की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है। दुकानदारों पर कार्रवाई के साथ निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी जांच का हिस्सा बनती है।
Raipur PDS Investigation: स्वदेश न्यूज़ की पड़ताल में हितग्राहियों की शिकायतें, राशन दुकानों की मौके की स्थिति, उपलब्ध रिकॉर्ड, दुकानदारों की ओर से दी गई जानकारी, खाद्य विभाग का पक्ष और प्रशासन की जांच में सामने आया स्टॉक अंतर—इन सभी पहलुओं को सामने रखा गया है। अब देखना होगा कि आगे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कार्रवाई का दायरा कितनी दूर तक जाता है।


