EWS Reservation Criteria : EWS पात्रता के मौजूदा मानकों की समीक्षा की मांग
EWS Reservation Criteria : जयपुर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण की पात्रता को लेकर व्यावहारिक दिक्कतों और समान अवसर से जुड़े मुद्दे उठाए गए। पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मांग रखी गई कि EWS पात्रता तय करने वाले मौजूदा मानदंडों की समीक्षा की जाए और उन्हें अलग-अलग राज्यों की वास्तविक आर्थिक, भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाए।वक्ताओं का कहना था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जमीन की कीमत, उसकी उत्पादकता, सिंचाई की सुविधा और उससे होने वाली आमदनी में बड़ा अंतर है। ऐसे में केवल जमीन के आकार या उसके स्वामित्व को आर्थिक स्थिति का आधार मानने से कई मामलों में परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति सामने नहीं आ पाती।
EWS Reservation Criteria : EWS आरक्षण 2019 में देशभर में हुआ लागू
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था संसद से कानून पारित होने के बाद 12 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ लागू हुई थी। इसके बाद विभिन्न राज्यों में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में EWS वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया गया।राजस्थान में भी फरवरी 2019 से सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। हालांकि, इसके पात्रता मानदंडों में कृषि भूमि और आवासीय भूखंड से जुड़े प्रावधानों को लेकर राज्य में व्यावहारिक समस्याएं सामने आने की बात कही गई।
EWS Reservation Criteria : राजस्थान में कुछ शर्तों में पहले भी हुआ बदलाव
कार्यक्रम में बताया गया कि सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों के बाद राज्य स्तर पर EWS से जुड़ी कुछ शर्तों में बदलाव किए गए। वर्ष 2022 में EWS प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि बढ़ाकर तीन वर्ष किए जाने से भी अभ्यर्थियों को राहत मिली।हालांकि, केंद्र सरकार के स्तर पर लागू नियमों को लेकर कई व्यावहारिक दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। इसी वजह से केंद्र की EWS पात्रता व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की मांग उठाई गई।
EWS Reservation Criteria : सिर्फ जमीन का आकार तय नहीं करता आर्थिक स्थिति
मांग रखने वालों ने कहा कि भारत के अलग-अलग राज्यों में भूमि की प्रकृति और आर्थिक उपयोगिता एक जैसी नहीं है। कहीं कृषि भूमि अत्यधिक उपजाऊ है तो कहीं कम वर्षा और सीमित सिंचाई सुविधाओं के कारण उसी आकार की जमीन से होने वाली आय काफी कम हो सकती है।राजस्थान की कम उपजाऊ या सीमित सिंचाई वाली जमीन की तुलना पंजाब के अधिक उत्पादक कृषि क्षेत्रों या दिल्ली-एनसीआर जैसे महंगे भूमि बाजारों से सिर्फ भू-स्वामित्व के आधार पर करना वास्तविक आर्थिक स्थिति का सही आकलन नहीं हो सकता।इसी आधार पर मांग की गई कि EWS पात्रता में भूमि के कुल क्षेत्रफल के साथ उसकी उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता, स्थानीय बाजार मूल्य और जमीन से होने वाली वास्तविक आर्थिक आय जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाए।
EWS Reservation Criteria : भूमि की आर्थिक उपयोगिता को भी मिले महत्व
कार्यक्रम में कहा गया कि जमीन का वास्तविक आर्थिक मूल्य हर राज्य और क्षेत्र में अलग हो सकता है। एक ही क्षेत्रफल की भूमि का बाजार मूल्य और उससे होने वाली आमदनी दो अलग-अलग राज्यों में काफी अलग हो सकती है।ऐसे में EWS पात्रता तय करने के लिए क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अधिक व्यावहारिक फार्मूला तैयार करने की आवश्यकता जताई गई। इसमें जमीन की उत्पादकता और उससे प्राप्त आय को भी महत्वपूर्ण आधार बनाने की मांग की गई।
EWS Reservation Criteria : सामान्य वर्ग में भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार
मुद्दा उठाने वालों ने यह भी कहा कि सामान्य वर्ग को आर्थिक रूप से एकसमान समूह मानना व्यावहारिक नहीं है। उनके अनुसार अलग-अलग जातियों और समुदायों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार मौजूद हैं और ऐसे परिवारों के सामने शिक्षा, रोजगार तथा बच्चों के भविष्य को लेकर आर्थिक चुनौतियां बनी रहती हैं।कार्यक्रम में ब्राह्मण, बनिया, कायस्थ, विश्नोई, राजपूत, राजपुरोहित, भूमिहार, खत्री, पंजाबी खत्री और त्यागी सहित विभिन्न समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन समुदायों के जरूरतमंद परिवारों को भी आर्थिक आधार पर उपलब्ध अवसरों का लाभ मिलना चाहिए।
EWS Reservation Criteria : केंद्रीय और राज्य OBC सूची के अंतर का मुद्दा
राजस्थान से जुड़ी एक अन्य समस्या केंद्रीय और राज्य OBC सूची में अंतर को लेकर बताई गई। दावा किया गया कि राजस्थान में 30 से अधिक ऐसी जातियां हैं जिन्हें राज्य स्तर पर OBC श्रेणी में रखा गया है, जबकि केंद्रीय स्तर पर वे अनारक्षित वर्ग में आती हैं।ऐसे समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को केंद्र स्तर पर EWS के मौजूदा मानदंडों के कारण आरक्षण का लाभ लेने में कठिनाई होने की बात सामने रखी गई। इस अंतर को भी EWS व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता से जोड़कर देखा गया।
EWS Reservation Criteria : राज्य में EWS प्रमाण-पत्र से कुछ परिवारों को राहत
कार्यक्रम में बताया गया कि राजस्थान में EWS प्रमाण-पत्र से जुड़ी कुछ शर्तों को सरल किए जाने के बाद कई जिलों के पात्र परिवारों को इसका लाभ मिला। अजमेर, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, कोटा, सिरोही और उदयपुर सहित कई जिलों का उल्लेख किया गया।हालांकि, मांग रखने वालों का कहना है कि राज्य स्तर पर किए गए बदलावों के बावजूद केंद्रीय व्यवस्था में अभी भी ऐसी शर्तें हैं, जिनसे पात्र परिवारों के सामने मुश्किलें बनी हुई हैं।
EWS Reservation Criteria : राज्य और केंद्र के प्रमाण-पत्र आंकड़ों का दिया गया उदाहरण
EWS व्यवस्था में अंतर को समझाने के लिए वर्ष 2022-23 के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान सरकार की ओर से उस अवधि में 2,77,555 EWS प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जबकि केंद्र सरकार की ओर से 95,243 प्रमाण-पत्र जारी किए गए।इन आंकड़ों को राज्य और केंद्र की EWS व्यवस्था के बीच मौजूद प्रक्रियात्मक और व्यावहारिक अंतर के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया गया। हालांकि, अलग-अलग स्तरों पर प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया, पात्रता और आवेदन के दायरे में अंतर होने के कारण इन आंकड़ों की सीधे तुलना करते समय संबंधित संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है।
EWS Reservation Criteria : केंद्र सरकार से व्यापक समीक्षा की मांग
कार्यक्रम में केंद्र सरकार से EWS पात्रता के मौजूदा मानकों की व्यापक समीक्षा करने की मांग की गई। मांग रखने वालों का कहना है कि नई व्यवस्था बनाते समय राज्यों की भौगोलिक स्थिति, कृषि उत्पादकता, जमीन के स्थानीय मूल्य और परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।उनके मुताबिक, ऐसा करने से EWS आरक्षण की पात्रता को ज्यादा व्यावहारिक बनाया जा सकता है और उन परिवारों तक अवसर पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जिन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
EWS Reservation Criteria : समान अवसर सुनिश्चित करने पर जोर
पूरे मुद्दे का केंद्र EWS आरक्षण को आर्थिक परिस्थितियों से जोड़कर अधिक व्यावहारिक बनाने की मांग है। इसके लिए केवल संपत्ति या भूमि की मात्रा के बजाय उसकी वास्तविक आर्थिक उपयोगिता, आय और क्षेत्रीय परिस्थितियों को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।मांग रखने वालों ने उम्मीद जताई कि केंद्र स्तर पर नियमों की समीक्षा कर ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिसमें अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों का अंतर ध्यान में रखा जाए और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में सुधार हो।


