Report: Arvind Chouhan
Gwalior होली के पावन पर्व के बाद भाई-दूज के अवसर पर ग्वालियर के केंद्रीय कारागार में मानवीय रिश्तों की एक बेहद सुंदर तस्वीर देखने को मिली। गुरुवार सुबह से ही जेल की ऊँची दीवारों के पीछे बंद भाइयों को तिलक करने के लिए हजारों की संख्या में बहनें उमड़ पड़ीं। जेल प्रशासन ने इस भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए थे, ताकि भाई-बहन का यह मिलन बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरे से गुजरीं बहनें
Gwalior जेल में बंद लगभग 3000 से अधिक सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों से मिलने के लिए उनकी बहनों की संख्या भाइयों से भी कहीं अधिक थी। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जेल प्रशासन ने स्थानीय पुलिस बल के सहयोग से त्रि-स्तरीय सुरक्षा (Three-layer security) चेकिंग की व्यवस्था की थी। गहन तलाशी और नियमों की पुष्टि के बाद ही महिलाओं को जेल परिसर के भीतर प्रवेश दिया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जेल के बाहर ट्रैफिक को भी डाइवर्ट किया गया था।
खुले मैदान में मिठाई और पूजा की विशेष व्यवस्था
Gwalior जेल प्रशासन ने इस बार कड़ाई बरतते हुए बाहर से किसी भी प्रकार की मिठाई, रंग या पूजा सामग्री लाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसकी जगह जेल के भीतर ही बहनों के लिए तिलक, अक्षत और मिठाइयों का उचित प्रबंध किया गया था। जेल के खुले मैदान में कतारबद्ध तरीके से बहनों को उनके भाइयों से मिलवाया गया। जेल की सलाखों की बंदिशों के बीच खुले आसमान के नीचे हुए इस मिलन ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया।
संयम और अनुशासन की मिसाल
Gwalior हजारों की संख्या में पहुँची महिलाओं के बावजूद जेल परिसर में अनुशासन देखने को मिला। जेल अधीक्षक के मार्गदर्शन में प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि हर बहन अपने भाई को तिलक कर सके और उसका मुंह मीठा करा सके। रक्षाबंधन और भाई-दूज जैसे त्योहारों पर ग्वालियर जेल में होने वाला यह आयोजन अब एक परंपरा बन चुका है, जो कैदियों के भीतर सुधारात्मक भावना और पारिवारिक जुड़ाव को जीवित रखने में मदद करता है।
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