हाथियों ने मानी “हाथी मित्र दल” की बात, आवाज सुनते ही लौटे जंगल

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हाथियों ने मानी “हाथी मित्र दल” की बात, आवाज सुनते ही लौटे जंगल

रिपोर्टर: भूपेन्द्र गबेल, Edit By; Mohit Jain

इंसान और हाथियों के बीच सामंजस्य की मिसाल पेश करते हुए रायगढ़ जिले के छाल रेंज के बोजिया क्षेत्र में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला। यहां 15 हाथियों का झुंड “हाथी मित्र दल” की बात मानते हुए सड़क छोड़ जंगल की ओर लौट गया। यह पूरा दृश्य कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।

“जंगल के अंदर जाओ” की आवाज पर लौटे हाथी

वन विभाग से जुड़ी “हाथी मित्र दल” की टीम को जैसे ही सूचना मिली कि हाथियों का दल गांव की ओर बढ़ रहा है, टीम के सदस्य मौके पर पहुंचे।
उन्होंने दूर से आवाज लगाई “जंगल के अंदर जाओ, रास्ता छोड़ दो।”
आश्चर्यजनक रूप से हाथियों ने आवाज को सुना और बिना कोई उत्पात मचाए धीरे-धीरे सड़क छोड़ जंगल की ओर बढ़ गए।

शांत व्यवहार से बन रहा सामंजस्य

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि “हाथी मित्र दल” के सदस्य नियमित रूप से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। वे आक्रोश या डर के बजाय शांत तरीके से संवाद करते हैं, जिससे हाथी उन्हें पहचानने लगे हैं और उनकी बातों का असर होता है।

विशेषज्ञ बोले – हाथी समझते हैं इंसान का व्यवहार

एलिफेंट एक्सपर्ट व पूर्व सीसीएफ के.के. बिसेन का कहना है कि हाथी इंसानों की भाषा भले न समझें, लेकिन उनके इशारे और टोन से उनके इरादे भांप लेते हैं।
वहीं डीएफओ जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि “हाथी मित्र दल” की सतर्कता और संवेदनशीलता के कारण ह्यूमन-एलिफेंट कॉन्फ्लिक्ट की घटनाएं घट रही हैं।

संवेदनशील प्रयास से टकराव में आई कमी

डीएफओ ने बताया कि जब स्थानीय लोग हाथियों के स्वभाव को समझते हैं और उन्हें उकसाने के बजाय रास्ता देते हैं, तो टकराव की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है।
“हाथी मित्र दल” की यह पहल अब अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

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