Economic Survey 2026: केंद्र सरकार आज 29 जनवरी को देश की अर्थव्यवस्था का सालाना लेखा-जोखा यानी इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश करेगी। यह सर्वे बताएगा कि बीते एक साल में महंगाई ने आम लोगों की जेब पर कितना असर डाला, खेती-किसानी की स्थिति कैसी रही और आने वाले समय में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे या नहीं। इसके ठीक बाद 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।
Economic Survey 2026: इन 6 बड़े मुद्दों पर रहेगा फोकस
1. महंगाई:
इकोनॉमिक सर्वे में दाल, तेल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों की वजहों का विश्लेषण होगा। साथ ही यह संकेत मिलेगा कि आने वाले महीनों में महंगाई से राहत मिलने की संभावना है या नहीं।
2. GDP ग्रोथ:
क्या भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा? GDP ग्रोथ मजबूत रहने का मतलब ज्यादा निवेश, व्यापार में तेजी और रोजगार के नए अवसर।
3. रोजगार:
आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में नौकरी की स्थिति कैसी रही? कहां रोजगार बढ़ा और किन सेक्टरों में छंटनी का खतरा बना हुआ है—युवाओं के लिए यह सबसे अहम हिस्सा होगा।
4. खेती-किसानी:
देश की करीब आधी आबादी कृषि पर निर्भर है। सर्वे में खेती की विकास दर, किसानों की आय और कृषि सुधारों को लेकर सरकार की रणनीति सामने आएगी।
5. सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटा:
सरकार की आय और खर्च के बीच के अंतर यानी राजकोषीय घाटे की स्थिति बताई जाएगी। घाटा कम होना मजबूत अर्थव्यवस्था और महंगाई पर नियंत्रण का संकेत माना जाता है।
6. विदेशी मुद्रा भंडार:
वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कितना मजबूत है, इसका असर रुपये की मजबूती और आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है।

इकोनॉमिक सर्वे क्या होता है?
इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का सालाना रिपोर्ट कार्ड होता है। इसमें बीते एक साल की आर्थिक स्थिति का आकलन और आने वाले साल के लिए चुनौतियों, सुधारों और सुझावों का जिक्र होता है।
कौन तैयार करता है सर्वे?
इकोनॉमिक सर्वे को वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की इकोनॉमिक डिवीजन तैयार करती है। इसकी अगुवाई मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) करते हैं। फिलहाल यह जिम्मेदारी डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन के पास है।

कितना जरूरी है सर्वे?
हालांकि सरकार पर सर्वे की सिफारिशों को मानना बाध्यकारी नहीं होता, लेकिन आमतौर पर इन्हीं संकेतों के आधार पर बजट की दिशा तय की जाती है।
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Economic Survey 2026: 1951 में आया था पहला सर्वे
देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया और तब से हर साल बजट से एक दिन पहले संसद में पेश किया जाता है।





