BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की पहली वर्षगांठ के मौके पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सीमा पार बैठे आकाओं और आतंकवादियों को पालने वाले पाकिस्तान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया कि यदि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उसे इसका ऐसा खमियाजा भुगतना पड़ेगा कि उसका अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।
New Delhi “भूगोल का हिस्सा बनेगा या इतिहास का, पाकिस्तान खुद तय करे”
दिल्ली में आयोजित एक रक्षा कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से सवाल पूछा गया था कि यदि पिछले साल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी परिस्थितियां दोबारा पैदा होती हैं, तो भारतीय सेना का अगला कदम क्या होगा? इस पर सीधा और कड़ा रुख अपनाते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा:
“अगर पाकिस्तान लगातार आतंकवादियों को पनाह देना और भारत के खिलाफ छद्म युद्ध व नापाक गतिविधियां जारी रखता है, तो उसे खुद ही यह तय करना होगा कि वह आने वाले समय में दुनिया के भूगोल (Geography) का हिस्सा बने रहना चाहता है या सिर्फ इतिहास (History) के पन्नों में सिमट कर रह जाना चाहता है।”
New Delhi क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जिसने पाकिस्तान को हिला दिया?
New Delhi सेना प्रमुख का यह बयान भारतीय सेना के उस ऐतिहासिक और अदम्य साहस वाले ऑपरेशन के ठीक एक साल पूरे होने पर आया है, जिसने पाकिस्तान पोषित आतंकवाद की कमर तोड़ दी थी:
- क्यों हुआ था ऑपरेशन: पिछले साल कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों के ऊपर एक बर्बर और कायराना आतंकी हमला किया गया था।
- सटीक प्रहार: इस हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने 6 और 7 मई की दरमियानी रात को एक बड़ा काउंटर-ऑपरेशन शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया।
- ठिकानों को किया जमींदोज: इस ऑपरेशन के तहत भारतीय जांबाजों ने सीमा पार पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के अंदर घुसकर आतंकियों के कई लॉन्च पैड्स और प्रशिक्षण शिविरों पर बेहद सटीक और विनाशकारी हमले (Precise Strikes) कर उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया था।
New Delhi आतंकवाद पर भारत की ‘नो टॉलरेंस’ नीति साफ
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारत के इस रुख को दोहरा दिया है कि आतंकवाद और बातचीत दोनों एक साथ नहीं चल सकते। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सेना प्रमुख का यह बयान महज एक कूटनीतिक जवाब नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना सीमा पर किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पहले से कहीं अधिक आक्रामक और तैयार स्थिति में है।
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