Report: Neha gupta
Arrah (बिहार): पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अटूट प्रेम का प्रतीक ‘वट सावित्री व्रत’ पूरे क्षेत्र में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। ज्येष्ठ मास की अमावस्या के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। आरा शहर के स्टेशन रोड स्थित महावीर मंदिर प्रांगण सहित विभिन्न इलाकों में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।

Arrah वटवृक्ष की परिक्रमा और निर्जला उपवास
वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर वटवृक्ष (बरगद के पेड़) की विधि-विधान से पूजा की। महिलाओं ने वृक्ष की जड़ों में जल अर्पित किया, कुमकुम-अक्षत लगाया और सूत के धागे को वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा की। इस दौरान महिलाओं ने अपने वैवाहिक जीवन में सुख और अटूट निष्ठा बनाए रखने की प्रार्थना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वटवृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा का विशेष महत्व है।

Arrah महिलाओं ने सुनी सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा
पूजा के दौरान वटवृक्ष के नीचे एकत्रित होकर महिलाओं ने सावित्री और सत्यवान की पौराणिक और प्रेरणादायक कथा सुनी। कथा के अनुसार, भद्रदेश के राजा अश्वपति और रानी मालवती की पुत्री सावित्री बेहद सुंदर, बुद्धिमान और धर्मपरायण थीं। विवाह योग्य होने पर उन्होंने सत्यवान को अपना वर चुना। सत्यवान की अल्पायु होने के बावजूद सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं। अपनी बुद्धिमत्ता, पातिव्रत्य धर्म और अटूट निष्ठा के बल पर सावित्री ने अंततः यमराज को भी विवश कर दिया और अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आईं।

Arrah आरा के मंदिरों में रहा उत्सव का माहौल
आरा शहर के महावीर मंदिर प्रांगण, स्टेशन रोड सहित शहर के गली-मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में भी इस पर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। पूजा के बाद महिलाओं ने अपने घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और आपस में सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की कामना की। दोपहर तक मंदिरों और पूजा स्थलों पर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।





