Rupee Falls Against Dollar : PM मोदी की कवायद, महंगाई से मिलेगी राहत ? 5 देशों का प्रधानमंत्री का दौरा, UAE से मिलेगी ऊर्जा ?
Rupee Falls Against Dollar : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और भारत में पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम… इन सबके बीच सवाल बड़ा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विदेश दौरा भारत को इस संकट से उबार पाएगा दरअसल, वैश्विक संकट का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला है। जिसको लेकर सरकार ने कई कदम उठाए हैं, अपील की है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी भी कर दी है। इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट संकट और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ में सप्लाई बाधित होना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन बचाने, सोना न खरीदने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और विदेशी यात्राएं कम करने की अपील की। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। अब पीएम मोदी का विदेश दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। खासतौर पर UAE दौरे के दौरान भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और एलपीजी सप्लाई को लेकर अहम समझौते किए हैं। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि सरकार संकट को केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी संभालने की कोशिश में जुटी है। लेकिन पेट्रोल डीजल के दामों पर विपक्ष सरकार पर हमलावार है। ऐसे में सवाल यही है कि आखिर संकट में सियासत कितनी जाएज। क्या सरकार की कूटनीति से जनता को महंगाई से राहत मिलेगी या फिर आने वाले दिनों में इस विकट, संकट का असर क्या होगा। इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।।

Rupee Falls Against Dollar : बुधवार की रात सोना महंगा हुआ। गुरुवार सुबह दूध। शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल और CNG महंगे हो गए। अब कल क्या महंगा होगा, कहा नहीं जा सकता। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है। रुपया आज डॉलर के मुकाबले 50 पैसे गिरकर पहली बार 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.64 के ऑल टाइम लो पर पहुंचा था। महंगाई आसमान पर पहुंचने को बेकरार है। थोक महंगाई 42 महीने में सबसे ऊपर और डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। सरकार भले ही दावा करती रही कि पेट्रोल डीजल का पर्याप्त स्टॉक है, दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। लेकिन सरकार के पास शायद कोई विकल्प नहीं था। अब पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है।CNG भी 2 रू. प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं। इस बढ़ोत्तरी का असर सीधे जनता की जेब पर पड़ा है।
Rupee Falls Against Dollar : पेट्रोल-डीजल, CNG में बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। सरकार अब तक तर्क देती रही थी कि मिडिल-ईस्ट युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया। लेकिन विपक्ष ने पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है और इसे आम आदमी पर बोझ बताया है।
Rupee Falls Against Dollar : विपक्ष जो भी आरोप लगाए, लेकिन सरकार का दावा है कि आज भी जनता पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जा रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक स्थिरता और जन-कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने का काम लगातार जारी रखे हुए है। दरअसल भारत की सबसे बड़ी चुनौती उसकी तेल आयात पर निर्भरता है। भारत अपनी जरूरत का 80 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है।अब मिडिल ईस्ट संकट लंबा खिंचता है तो महंगाई, व्यापार घाटा और रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। इसी लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हालही में देशवासियों से ईंधन बचाने, सोना न खरीदने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और विदेशी यात्राएं कम करने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। इस वैश्विक संकट के बीच अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 देशों UAE, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की 6 दिवसीय यात्रा पर हैं। पीएम मोदी का विदेश दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।खासतौर पर यूनाइटेड अरब अमीरात दौरे के दौरान भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और एलपीजी सप्लाई को लेकर अहम समझौते किए हैं। यूएई में दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और वेस्ट एशिया के हालात पर चर्चा की। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
Rupee Falls Against Dollar : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।पीएम मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।दरअसल UAE ने हाल ही में दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC छोड़ने का ऐलान किया है। UAE ने 2027 तक अपना क्रूड ऑयल उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बनाई है। ऐसे में भारतीय कंपनियों और UAE की कंपनियों के बीच लंबी अवधि के ऊर्जा समझौतों को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर सरकार संकट को केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी संभालने की कोशिश में जुटी है। रूस से तेल खरीद बढ़ाने, खाड़ी देशों से नए ऊर्जा समझौते और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर फोकस इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पीएम मोदी के दौरे का मकसद भी ऊर्जा सप्लाई को स्थिर रखना और भारत के लिए भरोसेमंद साझेदारी सुनिश्चित करना माना जा रहा है।लेकिन असली राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडिल ईस्ट संकट कितनी जल्दी शांत और वैश्विक तेल बाजार कब स्थिर होता है। साथ ही बड़ा सवाल ये भी कि क्या सिर्फ सरकार की कूटनीति से जनता को महंगाई से राहत मिलेगी ?
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