Bhopal : मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार आधुनिक और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। राज्य सरकार ने महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में नवजात और मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया जा रहा है। बेहतर मॉनिटरिंग और आधुनिक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे बच्चों को नया जीवन मिल रहा है।
Bhopal एसएनसीयू के शानदार नतीजे: राष्ट्रीय औसत को पछाड़कर 85.2% पर पहुँचा डिस्चार्ज रेट
Bhopal राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज के लिए संचालित ‘नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों’ (SNCU) के प्रदर्शन में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है:
- मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी: वर्ष 2024-25 में जहाँ 1,29,212 शिशुओं का उपचार हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,34,410 तक पहुँच गया।
- राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन: चालू वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 15 मई 2026 के बीच प्रदेश के 62 एसएनसीयू में भर्ती 15,054 नवजातों में से 12,818 को सफलतापूर्वक ठीक करके डिस्चार्ज किया गया। यहाँ का डिस्चार्ज रेट 85.2% रहा, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
- कम हुई मृत्यु और रेफरल दर: राज्य के चिकित्सा प्रबंधन की कुशलता के कारण लामा (LAMA) दर मात्र 2.12%, रेफरल दर 4.2% और शिशु मृत्यु दर घटकर 8.29% पर आ गई है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है।
- बढ़ाए गए बेड: इलाज की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने एसएनसीयू बिस्तरों की संख्या को 1,654 से बढ़ाकर 1,770 कर दिया है। इन इकाइयों में वेंटिलेटर, सी-पैप (C-PAP) और फोटोथेरेपी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा दी जा रही हैं।
Bhopal ज़ीरो सेपरेशन और डिजिटल नवाचार: ‘ई-शिशु’ परियोजना से कम हुई मृत्यु दर
स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और संवेदनशील अवधारणाओं को शामिल कर मध्य प्रदेश उप-जिला स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है:
- ‘ई-शिशु’ प्रोजेक्ट का कमाल: नवजात स्वास्थ्य को डिजिटल तकनीक से जोड़ने वाली अभिनव ‘ई-शिशु परियोजना’ से अब तक 9,889 शिशु लाभान्वित हो चुके हैं। इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 एसएनसीयू में इसके क्रियान्वयन से औसत रेफरल दर 5% से घटकर 4% और मृत्यु दर 8% से घटकर 6% पर आ गई है।
- एमएनसीयू की ‘जीरो सेपरेशन’ पहल: माँ और नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद अलग न करने के सिद्धांत (Zero Separation) पर काम करते हुए राज्य में 23 ‘मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट’ (MNCU) संचालित की जा रही हैं। यह व्यवस्था बच्चों को कंगारू मदर केयर और अनिवार्य स्तनपान कराने में बेहद मददगार साबित हो रही है।
- एनबीएसयू से ब्लॉक स्तर पर इलाज: ग्रामीण व उप-जिला स्तर पर 200 ‘न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट’ (NBSU) के माध्यम से हाई-रिस्क वाले बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही ऑक्सीजन और फोटोथेरेपी थेरेपी जैसी जरूरी आपातकालीन सेवाएं मिल रही हैं।
Bhopal मातृ दुग्ध इकाई (CLMC): 1100 से अधिक कमजोर शिशुओं के लिए वरदान बना ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’
उन नवजात शिशुओं के लिए जिन्हें जन्म के समय किन्हीं कारणों से अपनी माँ का दूध नहीं मिल पाता, सरकार की ‘मातृ दुग्ध इकाई’ जीवनरक्षक साबित हो रही है:
- मिल्क बैंक का सफल संचालन: इंदौर और भोपाल में क्रियाशील 2 कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर्स (CLMC) में वर्ष 2025-26 के दौरान 1,031 माताओं ने स्वेच्छा से 241.6 लीटर दूध दान किया।
- संक्रमण से सुरक्षा और पोषण: इस दान किए गए दूध को पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से पाश्चुरीकृत (Pasteurized) कर 1,159 गंभीर और कमजोर नवजात शिशुओं तक पहुँचाया गया। बच्चों को कुल 282.11 लीटर डोनर ह्यूमन मिल्क उपलब्ध कराया गया, जिसने उन्हें संक्रमण से बचाने और उनके स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





