मध्यप्रदेश के भिंड जिले में पुलिस द्वारा पत्रकारों के साथ की गई बर्बरता ने मीडिया जगत और आम जनता में गहरा सदमा पहुंचाया है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन विमेन प्रेस कॉप्से और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना से मामले की निष्पक्ष जांच कराने एवं दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भिंड में पत्रकारों पर पुलिस का अमानवीय व्यवहार
1 मई 2025 को भिंड के एसपी असीत यादव की मौजूदगी में पत्रकारों शशिकांत गोयल (दैनिक बेजोड़ रत्न) और अमरकांत चौहान (स्वराज एक्सप्रेस) के साथ मारपीट की गई। दोनों पत्रकारों को “चाय पर चर्चा” के बहाने एसपी कार्यालय बुलाया गया, जहां उनकी बेरहमी से पिटाई की गई।
मुख्य घटनाक्रम:
- पत्रकारों को उनके अंडरगारमेंट्स उतारकर प्रताड़ित किया गया।
- एसपी के कक्ष में पहले से मौजूद पत्रकारों के साथ भी पुलिस ने अमानवीय व्यवहार किया।
- शशिकांत और अमरकांत के खिलाफ पुलिस ने झूठी शिकायतें दर्ज कर दबाव बनाया।
पत्रकारों ने उजागर किया था अवैध रेत खनन और पुलिस की मिलीभगत
पत्रकारों ने चंबल नदी में चल रहे अवैध रेत खनन और इसमें स्थानीय पुलिस के संरक्षण को उजागर किया था। पुलिस प्रशासन ने इस रिपोर्टिंग को अपराध मानते हुए पत्रकारों को सबक सिखाने की कोशिश की।
समझौते के दबाव में एसपी के बंगले ले जाकर धमकाया गया
4 मई को पत्रकारों को ग्वालियर से दिल्ली जाने के लिए बहलाकर एक ढाबे पर ले जाया गया, जहां पहले से मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें फिर से धमकाया। इसके बाद एसपी के बंगले में समझौते का दबाव बनाया गया, ताकि वे मामले को आगे न बढ़ाएं।
पुलिस ने वायरल की दबाव में लिया गया वीडियो बयान
5 मई को एसपी ऑफिस बुलाकर दोनों पत्रकारों से वीडियो बयान लिए गए, जिसमें कहा गया कि मामला सुलझ गया है। पुलिस ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर पत्रकारों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
पत्रकारों ने दिल्ली पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत
लगातार प्रताड़ना के कारण शशिकांत गोयल और अमरकांत चौहान को पत्रकारिता छोड़नी पड़ी। 19 मई को उन्होंने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। मध्यप्रदेश स्टेट प्रेस क्लब ने भी 3 मई को इस मामले पर कार्रवाई की मांग की थी।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की डीजीपी से अपील
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना से निष्पक्ष जांच कराने और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार और अवैध कार्यों की रिपोर्टिंग कोई अपराध नहीं, बल्कि पत्रकारों का कर्तव्य है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मांग
- प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा गया है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करें।
- भिंड एसपी कार्यालय और एसपी बंगले की CCTV फुटेज को संरक्षित करने के निर्देश जारी करें।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
निष्कर्ष: पत्रकार सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता आवश्यक
यह घटना मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मीडिया कर्मियों को उनके कर्तव्य का निर्वहन करते हुए बिना भय-भ्रम के कार्य करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। इस मामले में न्याय मिलने से ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूती मिलेगी।





