संवाददाता: मनोज जंगम
देवी ने दी राजा को पर्व मनाने की अनुमति
बस्तर दशहरा की सबसे पहली और महत्वपूर्ण रस्म काछनगादी आज 21 सितंबर को शाम भंगाराम चौक पर विधिवत पूरी की गई। इस अवसर पर एक कुंवारी कन्या ने बेल के कांटों से बने झूले पर लेटकर दशहरे के पर्व को मनाने के लिए बस्तर राजपरिवार को अनुमति प्रदान की।
काछनगादी रस्म का महत्व
काछनगादी बस्तर दशहरा का सबसे प्रारंभिक और महत्वपूर्ण पर्व है। इसके बिना दशहरा उत्सव का विधिवत शुभारंभ नहीं माना जाता। यह रस्म दर्शाती है कि देवी स्वयं राजपरिवार को पर्व मनाने की अनुमति देती हैं, और तभी पूरे क्षेत्र में दशहरे की तैयारियां शुरू होती हैं।
75 दिनों तक चलने वाला विश्व प्रसिद्ध पर्व
बस्तर दशहरा पूरे 75 दिनों तक मनाया जाता है और इसे विश्व प्रसिद्ध माना जाता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को भी दर्शाता है।
रस्म का दृश्य
भंगाराम चौक पर आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक उपस्थित रहे। कुंवारी कन्या के झूले पर लेटने और देवी की अनुमति देने के बाद ही बस्तर राजपरिवार ने दशहरे का पर्व विधिवत आरंभ किया।





