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Banda : कालिंजर महोत्सव 2026: बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती पर सजेगा लोक संस्कृति और कला का महासंगम

Banda

Banda ‘इतिहास की गूंज, संस्कृति की आत्मा’ की प्रेरणादायी थीम के साथ बांदा जनपद में 15 फरवरी से तीन दिवसीय कालिंजर महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। जिला प्रशासन और पर्यटन-संस्कृति परिषद के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की एक बड़ी पहल है। कटरा कालिंजर मेला ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में परंपरा और आधुनिक प्रतिभा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

सुरों की महफिल और सांस्कृतिक गौरव: प्रमुख प्रस्तुतियां

Banda महोत्सव की शाम विख्यात कलाकारों के सुरों से सजेगी। सांस्कृतिक संध्या ‘आज की शाम कालिंजर के नाम’ के अंतर्गत प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक दिग्गज कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे:

  • 15 फरवरी: मशहूर गायिका तृप्ति शाक्या एंड ग्रुप भक्ति और लोक गीतों की रसधारा बहाएंगे।
  • 16 फरवरी: साधो द बैंड और राधा श्रीवास्तव युवाओं को सूफी और लोक संगीत से मंत्रमुग्ध करेंगे।
  • 17 फरवरी: बॉलीवुड पार्श्व गायिका ममता शर्मा और हास्य कलाकार राजा रेन्चो महोत्सव के समापन को यादगार बनाएंगे। इसके अतिरिक्त, बुंदेली लोकनृत्य, आल्हा गायन और वीर रस की कविताओं के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर को मंच प्रदान किया जाएगा।

Banda खेल महोत्सव और ‘बांदा गॉट टैलेंट’: युवाओं के लिए बड़ा मंच

Banda कालिंजर महोत्सव केवल गायन-वादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं की ऊर्जा और कौशल को भी समर्पित है।

  • खेलकूद प्रतियोगिताएं: प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक खेल महोत्सव का आयोजन होगा, जिसमें 15 फरवरी को खो-खो, 16 को कबड्डी और 17 को दंगल (कुश्ती) जैसी पारंपरिक स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी।
  • प्रतिभा की खोज: स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘बांदा गॉट टैलेंट’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्कूल, कॉलेज और जनपद स्तर के विजेता अपनी कलात्मक उत्कृष्टता का प्रदर्शन करेंगे।

पर्यटन संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा

Banda अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इस महोत्सव का उद्देश्य कालिंजर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करना है। महोत्सव के दौरान आयोजित ‘मंडलीय सरस मेले’ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस की झांकी में भी कालिंजर किले को प्रदर्शित कर इसकी वैश्विक पहचान को नई ऊँचाई दी गई थी।

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