Maha Shivaratri महाशिवरात्रि 2026: सर्वार्थ सिद्धि और सूर्य रश्मि योग का अद्भुत संगम, जानें साधना का विशेष महत्व

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Maha Shivaratri

Maha Shivaratri इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा और ज्योतिषीय गणनाओं के लिहाज से अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। ज्योतिष मठ संस्थान के प्रमुख ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार, इस बार शिवरात्रि पर बनने वाले विशेष सुयोग भक्तों के लिए साधना और सिद्धि के द्वार खोलेंगे। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह व्रत व्यक्ति को शिव तत्व से साक्षात्कार कराने का महापर्व है।

दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग: सर्वार्थ सिद्धि और सूर्य रश्मि योग

Maha Shivaratri पंडित विनोद गौतम ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि रविवार को होने से कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है।

Writer: Pandit Vishnu Goutam
  • मकर राशि में चंद्रमा: पूरी रात चंद्रमा मकर राशि में विद्यमान रहेगा, जिससे ‘सूर्य रश्मि योग’ का निर्माण होगा।
  • सिद्धि एवं सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः काल से ही सर्वार्थ सिद्धि योग सक्रिय रहेगा, जो इस दिन किए गए दान, जप और अभिषेक के फल को अनंत गुना बढ़ा देगा।
  • यह सुयोग ध्यान, साधना और मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से सहायक सिद्ध होने वाला है।

ब्रह्मांडीय ऊर्जा और शिवलिंग का रहस्य

Maha Shivaratri महाशिवरात्रि की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए पंडित गौतम ने कहा कि इस रात्रि पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर प्रवाहित होती है।

  • ऊर्जा का जागरण: शिवलिंग को ‘ब्रह्मांडीय ऊर्जा’ का प्रतीक माना गया है। अभिषेक और विशेष पूजा के माध्यम से भक्त अपनी आंतरिक ऊर्जा को संतुलित और सशक्त बना सकते हैं।
  • निशीथ काल का महत्व: अर्धरात्रि (निशीथ काल) में ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप विशेष कृपा प्रदान करता है। यह पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और चेतना के जागरण का अवसर है।

चार प्रहर की पूजा और मोक्ष की प्राप्ति

Maha Shivaratri पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत, पर्व और त्योहार तीनों श्रेणियों में आता है। भगवान शिव और माता पार्वती के परिणय उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि और अंततः मोक्ष प्रदान करता है।

  • विशिष्ट पूजन विधि: इस व्रत का कर्म काल पूरी रात चलता है, जिसमें चारों प्रहरों में पृथक-पृथक हवन और अभिषेक का विधान है।
  • पंडित गौतम के अनुसार, शिव तत्व को आत्मसात करने का यह दिन भक्तों को हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाकर जीवन में शुभता का संचार करता है।

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