Balram Krishi Mahotsav 2026 : ‘बलराम कृषि महोत्सव-2026’ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के अंतर्गत आयोजित एक राज्यस्तरीय अभियान है, राज्य स्तरीय महोत्सव का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, नवीन कृषि यंत्रों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण तथा सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से जोड़ना है, ताकि खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सके।बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को छह प्रमुख कृषि संकल्पों से जोड़ा जाएगा।
Balram Krishi Mahotsav 2026 : बलराम कृषि महोत्सव, किसान समृद्धि का उत्सव
इनमें प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा, जल संरक्षण और ‘हर खेत को पानी’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाना, कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक तकनीकों का विस्तार, फसल विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहन साथ ही किसान कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाना शामिल है।
Balram Krishi Mahotsav 2026 : बलराम कृषि महोत्सव से बदलेगी खेती की तस्वीर
बलराम कृषि महोत्सव को प्रदेश में कृषि विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि करना तथा खेती को अधिक आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाना है। दरअसल सरकार का फोकस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है, ऐसे में किसानों से सीधे संवाद स्थापित किया जाए और कृषि, पशुपालन, डेयरी तथा सहकारिता से जुड़ी योजनाओं का मिशन मोड में क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।।
आधुनिक कृषि की ओर बढ़ते कदम…
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) July 15, 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ‘बलराम कृषि महोत्सव-2026’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ
🗓️15 जुलाई, 2026
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Balram Krishi Mahotsav 2026 : ‘बलराम कृषि महोत्सव-2026’
• बलराम कृषि महोत्सव, तकनीक, प्रशिक्षण और तरक्की का संगम।
• सभी जिलों में जिला स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन।
• कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन।
• आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन और नई तकनीकों की प्रदर्शनी।
• किसानों की आय में वृद्धि और खेती को अधिक लाभकारी बनाना।
• आधुनिक कृषि तकनीक, ड्रोन, स्मार्ट खेती और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना।
• प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित करना।
• पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी सहायक गतिविधियों का विस्तार।
• किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी और लाभ उपलब्ध कराना।
• प्राकृतिक खेती, श्रीअन्न (मिलेट्स), जैविक खेती और जलवायु-अनुकूल कृषि पर विशेष फोकस।
• किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विभाग और निजी क्षेत्र के बीच संवाद का मंच।
• विभिन्न योजनाओं और नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
• जिले के प्रगतिशील एवं उत्कृष्ट किसानों का सम्मान।
• किसानों को तकनीकी साहित्य उपलब्ध कराया जाएगा।
• किसान नई तकनीकों को आसानी से अपनाकर अपनी खेती को अधिक उत्पादक बना सकें।

Balram Krishi Mahotsav 2026 : किसानों के हित में विभागों द्वारा कार्य
• उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण – उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हेक्टेयर एवं उत्पादन 490 लाख मीट्रिक टन बढ़ाने का लक्ष्य
• राजस्व – कृषि भूमि के भू-अर्जन पर बाजार दर से 4 गुना मुआवजा देने का निर्णय पीएम किसान सम्मान, मुख्यमंत्री किसान कल्याण में
Balram Krishi Mahotsav 2026 : सालाना 12000 की सहायता
• ऊर्जा- किसानों को ₹5 में बिजली के स्थाई कनेक्शन एवं 10 हॉर्सपावर तक ऊर्जा प्रभार पर सब्सिडी
• सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम – खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 60% तक प्रोत्साहन
• नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा – पीएम कुसुम योजना में 32 लाख किसानों को सोलर पंप देने का लक्ष्य
• कुटीर एवं ग्रामोद्योग – महिला एवं ग्रामीण युवाओं को कुटीर उद्योग से जोड़कर स्वरोज़गार को बढ़ावा সুস
• मध्यप्रदेश पर्यटन – ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन 1000 होम-स्टे बनाने का लक्ष्य
• जनसम्पर्क – कृषक कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार
• पशुपालन एवं डेयरी – दुग्ध संकलन प्रतिदिन 12 लाख लीटर से बढ़ाकर 50 लाख लीटर करने का लक्ष्य
• सहकारिता – 5,562 दुग्ध समितियों का वित्तीय समावेशन कर 83 हजार सदस्यों के जिला सहकारी बैंकों में खाते खोले गए 0% ब्याज दर पर
Balram Krishi Mahotsav 2026 : फसल ऋण, भुगतान के लिए साल भर का समय
• औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन – कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना पर 50% तक सब्सिडी
• मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास – ₹6000 करोड़ के मत्स्य निर्यात का लक्ष्य, ₹12,400 करोड़ का आ रहा निवेश
• जल संसाधन – 55 लाख हेक्टेयर में सिंचाई को वर्ष 2028-2 तक 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य
• नर्मदा घाटी विकास – नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से सिंचाई परियोजनाओं को वित्त पोषण
• संस्कृति – श्रीअन्न, ग्रामीण व्यंजन एवं स्थानीय परम्पराओं को प्रोत्साहन





