Ajay Nigam, Input Editor
Sleemanabad Tunne : मध्यप्रदेश की बरगी व्यपवर्तन परियोजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र के लाखों किसानों के भविष्य को बदलने वाला अभियान है। इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्लीमनाबाद टनल है, जिसे देश की सबसे लंबी जल सुरंगों में गिना जाता है। यह सुरंग नर्मदा के जल को प्राकृतिक ढलान के माध्यम से सोन नदी के जलग्रहण क्षेत्र तक पहुंचाकर विंध्य अंचल की सूखी धरती को हरियाली देने का मार्ग तैयार कर रही है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार नर्मदा और सोनभद्र अलग-अलग दिशाओं में बह निकले थे। स्लीमनाबाद टनल को प्रतीकात्मक रूप से उस विरह को समाप्त करने वाले सेतु के रूप में भी देखा जा रहा है, जो नर्मदा के जीवनदायी जल को विंध्य की धरती तक पहुंचाएगी।


Sleemanabad Tunne : 1450 गांवों के किसानों को मिलेगा लाभ
बरगी बांध से निकलने वाली 197 किलोमीटर लंबी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना का उद्देश्य “हर खेत को जल, हर किसान हो सबल” के संकल्प को साकार करना है।
Sleemanabad Tunne : देश की सबसे लंबी जल सुरंगों में शामिल
स्लीमनाबाद टनल की लंबाई 11.952 किलोमीटर और व्यास 10.14 मीटर है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नर्मदा का जल बिना किसी पंप के केवल गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के माध्यम से प्रवाहित होगा। यह आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राकृतिक विज्ञान का अनूठा संगम माना जा रहा है।

Sleemanabad Tunne : 17 वर्षों की कठिन यात्रा
इस सुरंग का निर्माण आसान नहीं था। विंध्य पर्वतमाला की कठोर चट्टानों, मार्बल, डोलोमाइट, स्लेट, भूमिगत जल, बड़ी-बड़ी प्राकृतिक गुफाओं (कैविटी), लगातार पानी के रिसाव, गैस उत्सर्जन और भू-वैज्ञानिक चुनौतियों ने निर्माण कार्य को बेहद कठिन बना दिया।
टनल निर्माण के दौरान टनल बोरिंग मशीनों को कई बार नुकसान पहुंचा। अमेरिकी मशीन के क्षतिग्रस्त होने के बाद जर्मन तकनीक की सहायता से कार्य को आगे बढ़ाया गया। आधुनिक ग्राउटिंग तकनीक, डी-वॉटरिंग सिस्टम और कोर ड्रिलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को अंतिम चरण तक पहुंचाया गया।
Sleemanabad Tunne : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की तकनीकी टीम ने लगातार 17 वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लगभग पूरा कर लिया है। अब सुरंग का अंतिम चरण शेष है और इसके पूर्ण होते ही नर्मदा का जल पहली बार विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा।
Sleemanabad Tunne : खेती और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
स्लीमनाबाद टनल के पूरा होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिलों की लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। दिसंबर 2026 तक लगभग 87 हजार हेक्टेयर तथा दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा जल संसाधन विभाग की अन्य परियोजनाओं को भी पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जाएगा।

इस परियोजना से फसल उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी, जल संकट कम होगा और पूरे विंध्य क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। स्लीमनाबाद टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के कृषि विकास, जल प्रबंधन और ग्रामीण समृद्धि की नई पहचान बनने जा रही है।





