भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल अगले सप्ताह मॉस्को में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं। यह सम्मेलन 27 से 29 मई 2025 तक चलेगा और रूस की सुरक्षा परिषद द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस बैठक में ग्लोबल साउथ, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), और यूरेशियन देशों के सुरक्षा प्रमुख शामिल होंगे। दक्षिण एशिया में बढ़ती तनाव की पृष्ठभूमि में, यह बैठक भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों के बीच आमने-सामने संवाद के लिए नया अवसर भी प्रदान कर सकती है।
13वीं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बैठक की मुख्य बातें
- तारीख: 27-29 मई 2025
- स्थान: मॉस्को, रूस
- अध्यक्षता: रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु
- आमंत्रित: 150 से अधिक देश, जिनमें ग्लोबल साउथ, CIS, CSTO, EAEU, SCO और 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं
इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों जैसे आतंकवाद, साइबर खतरे और भू-राजनीतिक स्थिरता पर सहयोग को बढ़ाना है।
हाल की तनावपूर्ण स्थिति में भारत-पाकिस्तान संवाद की संभावना
भारत और पाकिस्तान दोनों ही SCO के सदस्य हैं, और पाकिस्तान के NSA लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक भी इस बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं। इस बार रूस की मेजबानी में दोनों देशों के NSA के बीच आमने-सामने मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।
पृष्ठभूमि:
- 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिससे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया।
- इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए।
- पाकिस्तान ने इसके बाद 8, 9 और 10 मई को भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
- 10 मई को दोनों देशों के सैन्य संचालन प्रमुखों के बीच वार्ता के बाद शांति स्थापित करने का समझौता हुआ।
यह बैठक इस नाजुक शांति को और मजबूत करने का जरिया बन सकती है।
रूस का क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में बढ़ता हुआ योगदान
रूस, सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करते हुए, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में सदस्य देशों के सहयोग पर जोर दे रहा है। रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रूडेन्को ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र, BRICS, और SCO के माध्यम से आतंकवाद से निपटने के लिए मिलकर काम करने का वादा किया है।
मॉस्को सम्मेलन में किन पहलुओं पर नजर रखनी चाहिए?
- आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और खुफिया साझेदारी
- भारत-पाकिस्तान NSA के बीच संभावित द्विपक्षीय संवाद
- ग्लोबल साउथ और यूरेशियाई देशों के बीच आर्थिक और साइबर सुरक्षा सहयोग
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-रूस सैन्य तकनीकी साझेदारी
निष्कर्ष: दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक मौका
मॉस्को में होने वाली यह सुरक्षा बैठक दक्षिण एशिया के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। भारत-पाकिस्तान संबंधों में चल रही नाजुक शांति और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग के महत्व को देखते हुए, NSA अजीत डोवाल की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। यह सम्मेलन द्विपक्षीय संवाद को बढ़ावा देने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक मंच प्रदान करता है।





