रिपोर्ट- अरविंद चौहान, एडिटेड- विजय नंदन,
ग्वालियर : जिले में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नौगांव इलाके में साढ़े तीन साल के मासूम अभिमन्यु पर आवारा कुत्ते ने जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजनों के अनुसार, उन्होंने डेढ़ महीने पहले ही आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन और नगर निगम से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिम्मेदारों की इस लापरवाही के चलते मासूम की जान पर बन आई।

खेलते समय कुत्ते ने किया हमला
जानकारी के मुताबिक, अभिमन्यु घर के बाहर खेल रहा था, तभी अचानक एक आवारा कुत्ता उस पर टूट पड़ा। कुत्ते के जबड़े से बच्चे को छुड़ाने के लिए उसकी मां को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अभिमन्यु गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके माथे व आंख के पास गहरे घाव हो गए।

अस्पताल में भर्ती, एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया
घटना के बाद परिवार ने बच्चे को तत्काल ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाने के साथ घावों की ड्रेसिंग की।
परिजनों का आरोप: शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
अभिमन्यु के पिता हरीश दीक्षित ने बताया कि उन्होंने 1.5 महीने पहले सीएम हेल्पलाइन और नगर निगम को कॉल कर आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग की थी, लेकिन समय रहते कोई एक्शन नहीं लिया गया।
हरीश दीक्षित (अभिमन्यु के पिता): “हमारे आस-पास 8-10 आवारा कुत्ते हैं। शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। अगर समय रहते कदम उठाया जाता तो आज मेरे बेटे की ये हालत नहीं होती। अधिकारियों को अब जागना होगा वरना ऐसे हादसे बढ़ते रहेंगे।”
हर दिन 200 से ज्यादा लोग हो रहे शिकार
ग्वालियर में आवारा कुत्तों के हमलों के आंकड़े भी डराने वाले हैं। बताया जाता है कि हर दिन जिले में दो सौ से अधिक लोग इनका शिकार बन रहे हैं।
बच्चों की ऊँचाई और आकार
कुत्तों की नजर में छोटे बच्चे वयस्कों की तुलना में कम डराने वाले और असुरक्षित लगते हैं। बच्चे छोटे कद के होते हैं, उनकी हरकतें भी असंतुलित होती हैं। इससे कुत्ते उन्हें खतरे के रूप में या शिकार की तरह समझ सकते हैं।
2. कुत्तों के लिए अपरिचित गंध और आवाज
बच्चे अक्सर ऊँची आवाज़ में खेलते हैं, अचानक चीखते या दौड़ते हैं। यह कुत्तों के लिए डर या खतरे का संकेत बन जाता है। वे आक्रामक हो सकते हैं।
3. भूख और भोजन की कमी
सड़कों पर रहने वाले कुत्ते अक्सर भूखे होते हैं। जब उन्हें खाना नहीं मिलता, तो उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है और वे आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं।
4. क्षेत्रीय स्वभाव (Territorial Behavior)
कुत्ते अपना इलाका मानते हैं। जब बच्चे गलियों, पार्कों या उनकी ‘जगह’ पर खेलते हैं, तो कुत्तों को लगता है कि कोई उनके क्षेत्र में घुस आया है। वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हमला कर देते हैं।
5. पहले से बुरा अनुभव
कभी-कभी कुत्तों के साथ किसी ने दुर्व्यवहार किया हो (पत्थर मारना, भगाना), तो वे हर इंसान को दुश्मन समझकर हमला करने लगते हैं। बच्चे सबसे आसान लक्ष्य बन जाते हैं।
6. प्रजनन काल (Breeding Season)
जब मादा कुत्ते बच्चे देती हैं, तो उनकी ‘मेटिंग सीज़न’ या ‘पिल्लों की सुरक्षा’ की प्रवृत्ति बहुत मजबूत होती है। इस दौरान वे किसी भी अजनबी (खासतौर पर बच्चों) को खतरा मानकर हमला कर सकती हैं।
7. बीमारियाँ और रैबीज
रैबीज या अन्य संक्रमण से ग्रस्त कुत्तों का व्यवहार अप्रत्याशित और आक्रामक हो सकता है। ऐसे कुत्ते अक्सर काटने लगते हैं।
बचाव के उपाय
- बच्चों को सिखाएं कि वे आवारा कुत्तों के करीब न जाएँ।
- कुत्तों को पत्थर न मारें, न चिढ़ाएँ।
- म्युनिसिपल बॉडीज़ को नियमित रूप से स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी, टीकाकरण और फूड मैनेजमेंट करना चाहिए।
- स्कूल और कॉलोनियों में Awareness Program चलाए जाएँ।





