क्रेडिट कार्ड से अब नहीं भर पाएंगे घर का किराया: RBI की नई गाइडलाइन का असर

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क्रेडिट कार्ड से अब नहीं भर पाएंगे घर का किराया: RBI की नई गाइडलाइन का असर

BY: MOHIT JAIN

अगर आप हर महीने फोनपे, पेटीएम, क्रेड या अमेज़न पे जैसे ऐप्स से क्रेडिट कार्ड के जरिए किराया भरते थे, तो अब यह सुविधा पूरी तरह बंद हो चुकी है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने हाल ही में नए नियम लागू किए हैं, जिसके चलते सभी प्रमुख पेमेंट प्लेटफॉर्म्स ने रेंट पेमेंट सर्विस पर रोक लगा दी है।

RBI ने क्यों उठाया यह कदम?

RBI ने पेमेंट एग्रीगेटर्स और गेटवे के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत ये प्लेटफॉर्म अब केवल उन्हीं व्यापारियों (merchants) को सेवाएं दे पाएंगे जिनकी KYC पूरी हो चुकी है और जिनसे उनका सीधा करार है। चूंकि मकान मालिक आम तौर पर रजिस्टर्ड मर्चेंट नहीं होते, इसलिए उनके खाते में क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन की अनुमति अब नहीं होगी।

क्रेडिट कार्ड से किराया भरने पर रोक क्यों लगी?

पिछले कुछ सालों में कई लोग इस सुविधा का गलत इस्तेमाल करने लगे थे। वे किराया भुगतान के नाम पर दोस्तों या रिश्तेदारों को पैसे ट्रांसफर करते थे और बदले में क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स व कैशबैक का फायदा उठाते थे। मकान मालिकों की KYC पूरी न होने और फिनटेक कंपनियों के “मार्केटप्लेस” की तरह काम करने पर RBI ने सख्ती दिखाई और इसे गैरकानूनी माना।

बैंकों ने पहले ही शुरू कर दी थी सख्ती

RBI के कदम से पहले ही कई बैंक इस पर नियंत्रण लगाने लगे थे।

  • HDFC बैंक ने जून 2024 से क्रेडिट कार्ड द्वारा किराया भुगतान पर 1% अतिरिक्त शुल्क (अधिकतम ₹3,000) लागू किया।
  • ICICI और SBI कार्ड ने ऐसे भुगतानों पर रिवॉर्ड पॉइंट्स देना बंद कर दिया।
  • SBI कार्ड्स ने किराया भुगतान पर अपनी फीस भी कई बार बढ़ाई और बताया कि उनके रिटेल खर्च का बड़ा हिस्सा रेंट पेमेंट से आ रहा था।

किन प्लेटफॉर्म्स पर सर्विस बंद हुई?

मार्च 2024 में ही फोनपे, पेटीएम, मोबिक्विक, फ्रीचार्ज और अमेज़न पे जैसे ऐप्स ने यह सुविधा बंद कर दी थी। अब सितंबर 2025 में RBI के नए नियम लागू होने के बाद क्रेड सहित बाकी सभी फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने भी क्रेडिट कार्ड से रेंट पेमेंट का विकल्प पूरी तरह हटा दिया है।

किस पर पड़ेगा असर?

  • किरायेदारों पर: अब वे क्रेडिट कार्ड से किराया नहीं दे पाएंगे। इसका मतलब है कि उन्हें रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और ब्याज-मुक्त अवधि जैसे फायदे नहीं मिलेंगे।
  • बैंकों पर: कार्ड फीस और इंटरचेंज से होने वाली आमदनी में कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे SBI कार्ड्स जैसी कंपनियों की आय और मुनाफे पर असर पड़ेगा।
  • फिनटेक कंपनियों पर: किराया भुगतान हाल के वर्षों में उनके लिए सबसे तेजी से बढ़ता सेगमेंट था। अब उन्हें नए बिजनेस मॉडल और ऑफर्स तलाशने होंगे।

अब किरायेदारों के पास क्या विकल्प हैं?

किरायेदार अब निम्न तरीकों से किराया चुका सकेंगे:

  • UPI
  • बैंक ट्रांसफर (NEFT, RTGS, IMPS)
  • चेक
  • स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शंस (ऑटोमैटिक पेमेंट)

यानी अब किराया तुरंत देना होगा, क्रेडिट कार्ड की तरह बाद में चुकाने का विकल्प नहीं रहेगा।

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