Digital Attendance Failure MP: गुना के स्कूलों में डिजिटल हाजिरी फेल: बमोरी क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों में लटके ताले, शिक्षक गायब

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Digital Attendance Failure MP

रिपोर्ट: विजय अहिरवार

Digital Attendance Failure MP कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर देखना हो तो गुना जिले के आदिवासी बहुल बमोरी ब्लॉक का रुख किया जा सकता है। एक तरफ सरकार डिजिटल अटेंडेंस को लेकर ‘नो वर्क, नो पे’ जैसे सख्त नियम लागू करने की धमकियां दे रही है, तो दूसरी तरफ बमोरी क्षेत्र में इन आदेशों का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। हाल ही में कपासी जनशिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले कई शासकीय स्कूलों की औचक जमीनी पड़ताल की गई, जहाँ सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आई।

Digital Attendance Failure MP बंद पड़े स्कूल बयां कर रहे हैं बदहाली की दास्तान

निरीक्षण के दौरान बमोरी ब्लॉक के आदिवासी बहुल इलाकों में संचालित होने वाले कई स्कूल पूरी तरह बंद पाए गए। इनमें बलखंडी विद्यालय, कुम्हारी विद्यालय, पाड़ोन विद्यालय, मिशलपुरा विद्यालय और माना विद्यालय शामिल हैं, जिनके मुख्य द्वारों पर ताले लटके हुए थे। इसके अलावा, भगवानपुरा विद्यालय की स्थिति भी अलग नहीं थी; वहां भी समय से पहले ही तालाबंदी हो चुकी थी। ये बंद ताले साफ तौर पर दर्शाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में नौनिहालों की शिक्षा को लेकर तंत्र कितना लापरवाह है।

Digital Attendance Failure MP कहीं खाली क्लासरूम, तो कहीं गायब मिले ‘गुरुजी’

जिन कुछ स्कूलों के ताले खुले मिले, वहां की व्यवस्था और भी चिंताजनक थी। बरबन एकीकृत माध्यमिक विद्यालय में तीन शिक्षक तो मौजूद थे, लेकिन महिला शिक्षिका सरिता सिंह बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाई गईं। चौंकाने वाली बात यह थी कि स्कूल खुले होने के बाद भी वहां एक भी छात्र उपस्थित नहीं था। इसी तरह, बघुरिया माध्यमिक विद्यालय में दो शिक्षकों में से पंकज वैष्णव तो ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन उनके साथी शिक्षक अखिलेश नाथ बिना बताए नदारद थे।

Digital Attendance Failure MP कागजों तक सीमित रही ‘डिजिटल अटेंडेंस’ की सख्ती

शिक्षकों की समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सरकार मोबाइल ऐप और डिजिटल हाजिरी पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। मगर बमोरी ब्लॉक की यह कड़वी सच्चाई बताती है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कड़े निरीक्षण के बिना यह पूरी तकनीक एक ‘फ्लॉप शो’ साबित हो रही है। ग्रामीण इलाकों में कभी खराब नेटवर्क का बहाना बनाकर तो कभी मॉनिटरिंग की कमी का फायदा उठाकर शिक्षक अपनी मनमर्जी चला रहे हैं, जिससे गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।

कड़ी कार्रवाई की तैयारी: कटेगा वेतन, होगी विभागीय जांच इस जमीनी खुलासे के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) समर सिंह राठौड़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बंद पाए गए सभी स्कूलों के अनुपस्थित स्टाफ का वेतन काटा जाएगा और मामले की विस्तृत जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही रोकने के लिए भविष्य में भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।

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