रिपोर्ट- चन्द्रभान साहू
कांकेर जिले के नरहरपुर विकासखंड के ग्राम मांडाभर्री में ग्राम पटेल गिरवर पांडे की अंतिम यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सामान्यत: अंतिम संस्कार के अवसर पर जहां शोक और मातम का माहौल होता है, वहीं यहां ग्रामीणों ने दिवंगत आत्मा को विदाई देने का अनोखा तरीका अपनाया।
बीमारी से हुआ निधन
सूत्रों के अनुसार, गिरवर पांडे का निधन एक बीमारी के चलते हुआ। उनके निधन से गांव में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन परिवार और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार को पारंपरिक मातम से अलग हटकर श्रद्धा और सम्मान का रूप दिया।
भजन-कीर्तन और बाजे-गाजे के साथ विदाई
अंतिम यात्रा के दौरान “एखर का भरोसा”, “चोला माटी के हे राम” जैसे भजनों की मधुर धुनों के साथ गांववासियों ने गिरवर पांडे को विदाई दी। बाजे-गाजे और भजन-कीर्तन के बीच वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर उठा।
सैकड़ों लोग हुए शामिल
गांव के सैकड़ों लोग इस अंतिम यात्रा में शामिल हुए और शोक के बजाय संगीत, भक्ति और श्रद्धा के माहौल में गिरवर पांडे को अंतिम विदाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि इस परंपरा से दिवंगत आत्मा को सच्चे अर्थों में शांति और सम्मान मिलता है।
चर्चा का विषय बनी अनोखी परंपरा
ग्राम मांडाभर्री में निकली यह भव्य अंतिम यात्रा अब आसपास के गांवों में भी चर्चा का विषय बन गई है। लोग इसे श्रद्धा और सम्मान की मिसाल बता रहे हैं।





