रिपोर्ट- लोकेश सिन्हा
लेखक- ईसा अहमद
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में ओडिशा सीमा से लगे देवभोग और अमलीपदर तहसील क्षेत्र के 150 से अधिक गांवों में नवा खाई पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर लगभग 80 हजार परिवारों ने नए अन्न की पूजा कर नवान्न भक्षण की परंपरा निभाई।
कैसे मनाया जाता है नवा खाई
इस पर्व पर ग्रामीणजन नए वस्त्र धारण कर अपने इष्ट देवों का पूजन करते हैं। पूजा के बाद सबसे पहले नए अनाज का भोग देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद उसी अन्न को प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर परिवार और समुदाय के लोग साथ बैठकर नवान्न भक्षण की परंपरा को पूरा करते हैं।
सरकार ने दिया अवकाश का तोहफा
इस वर्ष नवा खाई पर्व की खुशियां उस समय और बढ़ गईं जब राज्य सरकार ने इसके लिए एक दिवसीय अवकाश घोषित कर दिया। सरकार का कहना है कि प्रदेश में लगभग 50 लाख लोग इस पारंपरिक पर्व को मनाते हैं, ऐसे में उनके सम्मान और परंपरा को संजोने के लिए अवकाश घोषित किया गया है।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
नवा खाई केवल एक फसल उत्सव नहीं है, बल्कि यह समृद्धि, एकता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व ग्रामीणों के जीवन में नई ऊर्जा और सामूहिकता का संदेश देता है।





