लोकेशन – लोरमी, संवाददाता: सुधेश पांडेय
मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड अंतर्गत वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहद चिंताजनक है। यहां न तो स्कूल समय पर खुल रहे हैं और न ही शिक्षक निर्धारित समय पर मौजूद रहते हैं। ग्रामीण बच्चों की शिक्षा का भविष्य ऐसे में पूरी तरह भगवान भरोसे नजर आ रहा है।
बिजराकछार गांव का हाल
सोमवार को लोरमी ब्लॉक के बिजराकछार गांव में स्थिति बेहद चौंकाने वाली रही। यहां की पूर्व माध्यमिक शाला में दोपहर 1 बजकर 28 मिनट पर भी ताला लटका हुआ पाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक सुबह स्कूल आए थे, लेकिन कम बच्चों की उपस्थिति देखकर स्कूल में ताला लगाकर चले गए।
औपचारिकता मात्र बनी पढ़ाई
कुछ अन्य स्कूलों में ताले तो नहीं थे, लेकिन वहां भी स्थिति लगभग वैसी ही रही। गिने-चुने शिक्षक ही सिर्फ औपचारिकता निभाने पहुंचे थे और बच्चों की संख्या भी उंगलियों पर गिनने लायक थी। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार स्कूल देर से खुलते हैं और कुछ घंटों बाद ही बंद कर दिए जाते हैं, जबकि निर्धारित समय के अनुसार स्कूल की छुट्टी शाम 4 बजे होती है।
शिक्षा विभाग की गंभीरता पर सवाल
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी केवल कागजी जांच तक सीमित रहते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल अलग है। विभाग की लापरवाही से ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
ऐसी लापरवाही बच्चों और उनके परिजनों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है और शिक्षक का गैरजिम्मेदाराना रवैया अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। अब सवाल यह है कि क्या विभाग ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई करेगा या बच्चों का भविष्य यूं ही दांव पर लगा रहेगा?





