BY: Yoganand Shrivastva
उत्तर प्रदेश: फतेहपुर जिले में 200 वर्ष पुराने नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर विवाद गहरा गया है। आबूनगर के रेडईया मोहल्ले में स्थित इस ढांचे पर हिंदू संगठनों का दावा है कि यह मकबरा नहीं, बल्कि ठाकुर जी का मंदिर है। वे यहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति मांग रहे हैं। विवाद के मद्देनज़र इलाके में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई है।
बैरिकेडिंग तोड़कर पहुंचे कार्यकर्ता
बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी जिलाध्यक्ष सहित कई लोग पहले ही 11 अगस्त को पूजा-पाठ का ऐलान कर चुके थे। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए मकबरे के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी थी, लेकिन सुबह कार्यकर्ताओं ने अवरोध तोड़कर परिसर तक पहुंचने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
विवाद की जड़
हिंदू संगठनों का कहना है कि यहां पहले शिव और श्रीकृष्ण का मंदिर था, जिसे तोड़कर मकबरा बनाया गया। उनके अनुसार, परिसर में कमल के फूल और त्रिशूल के निशान मंदिर के अस्तित्व का प्रमाण हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि यह ऐतिहासिक मकबरा है और धार्मिक स्थलों में विवाद पैदा किया जा रहा है।
कड़ी सुरक्षा
तनाव को देखते हुए प्रशासन ने शहरभर में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी है। हर गली और प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा बल गश्त कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।





