भारत ने दिखाई सैन्य तैयारी, 1 लाख करोड़ की डिफेंस खरीद को ग्रीन सिग्नल

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1 लाख करोड़ डिफेंस डील

भारत ने अपनी रक्षा ताकत को नई ऊंचाई देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में 1.05 लाख करोड़ रुपये (करीब 12.6 अरब डॉलर) के डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रपोजल्स को मंजूरी दी है। यह फैसला भारत की सैन्य तैयारियों, आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

इस आर्टिकल में जानिए:

✅ किन-किन हथियारों और सिस्टम्स की मंजूरी मिली है?
✅ भारत के लिए यह फैसला क्यों अहम है?
✅ इसका सामरिक (स्ट्रैटजिक) महत्व क्या है?
✅ कब से इनकी खरीद प्रक्रिया शुरू होगी?


डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) क्या है?

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल, रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सबसे उच्च स्तर की निर्णय लेने वाली संस्था है। इसका काम:

  • सेना, नौसेना और वायुसेना की जरूरतों के अनुसार रक्षा उपकरणों की खरीद को मंजूरी देना।
  • रक्षा आधुनिकीकरण की प्राथमिकताएं तय करना।
  • ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देना।

इस काउंसिल की अध्यक्षता देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं।


1 लाख करोड़ के प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल है?

इस बार मंजूरी मिले प्रस्ताव पूरी तरह से ‘IDDM’ (Indigenously Designed, Developed and Manufactured) कैटेगरी के तहत हैं, यानी इनमें 100% स्वदेशी डिजाइन और निर्माण होगा।

मुख्य मंजूरी प्राप्त हथियार और सिस्टम:

1. QRSAM: क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम

  • इंडियन आर्मी के लिए विकसित।
  • 30 किलोमीटर तक की रेंज।
  • ट्रक-माउंटेड, कहीं भी तैनात किया जा सकता है।
  • 90-95% तक एक्युरेसी।
  • DRDO द्वारा डिजाइन, भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्माण।
  • कुल प्रोजेक्ट लागत: 300 करोड़ रुपये।

2. माइन काउंटर मेजर वेसल (Navy)

  • दुश्मन देशों द्वारा समुद्र में बिछाई गई माइंस को खोजने और निष्क्रिय करने वाला जहाज।
  • इंडियन शिपयार्ड्स (संभावित गोवा शिपयार्ड) द्वारा निर्माण।

3. मूड माइंस (Navy)

  • भारत की समुद्री सीमाओं और पोर्ट्स की सुरक्षा के लिए समुद्र के भीतर लगाए जाने वाले स्टैटिक अंडरवाटर एक्सप्लोसिव्स।
  • दुश्मन के जहाज या पनडुब्बी जैसे ही पास आएंगे, इनसे हमला किया जा सकता है।

4. सबमर्सिबल ऑटोनॉमस वेसल

  • समुद्र के नीचे चलने वाले मानव रहित जहाज।
  • इंटेलिजेंस गैदरिंग, सर्विलांस और माइंस डिटेक्शन में उपयोगी।
  • ऑटोनॉमस नेवल वॉरफेयर कैपेबिलिटी को मजबूती।

5. सुपर रैपिड गन माउंट्स (Navy)

  • नेवल वॉरशिप्स पर तैनात फास्ट, मल्टी-रोल गन सिस्टम।
  • 1 मिनट में 120 से ज्यादा राउंड फायर करने की क्षमता।
  • एयरक्राफ्ट, ड्रोन, मिसाइल्स आदि को आसानी से टारगेट कर सकता है।

6. आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (Army)

  • युद्ध क्षेत्र में खराब या क्षतिग्रस्त टैंक्स को रिकवर करने के लिए विशेष वाहन।
  • अर्जुन टैंक के साथ ऑपरेट करने के लिए डिजाइन।
  • भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) द्वारा निर्माण।

7. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम (Army)

  • दुश्मन के कम्युनिकेशन और रडार सिस्टम को इंटरसेप्ट और जैम करने की क्षमता।
  • साइबर वॉरफेयर और डिजिटल युद्ध कौशल में इजाफा।

8. ट्राई-सर्विसेज इंटीग्रेटेड इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम

  • आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के संसाधनों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट करना।
  • डुप्लीकेशन खत्म, लॉजिस्टिक्स और मैनेजमेंट में सुधार।

भारत के लिए सामरिक (Strategic) महत्व

यह डिफेंस डील भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

✅ ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा।
✅ MSME और प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका।
✅ हज़ारों नई नौकरियों का सृजन।
✅ रक्षा तैयारियों में तेजी।
✅ दुश्मन देशों के खिलाफ ताकतवर प्रतिक्रिया देने की क्षमता।
✅ कराची हार्बर जैसे ऑपरेशन के अनुभव से मिली सीख का इस्तेमाल।
✅ एयर, लैंड और सी – तीनों मोर्चों पर बैलेंस्ड क्षमता निर्माण।


आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

फिलहाल ‘Acceptance of Necessity’ (AON) स्टेज पर मंजूरी दी गई है। आगे ये कदम उठाए जाएंगे:

  • डिफेंस मंत्रालय द्वारा टेंडर जारी।
  • कंपनियों से तकनीकी परीक्षण और मूल्यांकन।
  • सबसे योग्य और किफायती कंपनियों का चयन।
  • अगले 6 महीनों से 2 साल में प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद।

खासकर QRSAM मिसाइल सिस्टम के अगले 2 साल में सेना में शामिल होने की संभावना है।


किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?

  • DRDO, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों को बड़ा लाभ।
  • L&T, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, निजी रक्षा कंपनियों को ऑर्डर मिलने की उम्मीद।
  • अनुमानित 40-50 हजार डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियों का सृजन।
  • भविष्य में इन सिस्टम्स का एक्सपोर्ट भी संभव।
  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और AI इंटीग्रेशन को बढ़ावा।

निष्कर्ष: भारत कर रहा है बड़ी तैयारी

इस बड़े रक्षा फैसले से साफ है कि भारत न सिर्फ मौजूदा खतरों का सामना करने के लिए तैयार है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य ताकत को आत्मनिर्भर और अत्याधुनिक बना रहा है।


FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. QRSAM मिसाइल सिस्टम क्या है?
A. यह एक क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है, जिसे DRDO ने इंडियन आर्मी के लिए डिजाइन किया है।

Q. क्या यह पूरी डील स्वदेशी है?
A. हां, पूरा प्रोजेक्ट ‘IDDM’ कैटेगरी के तहत है यानी 100% भारत में ही डिजाइन और निर्माण होगा।

Q. इसका नौजवानों के लिए क्या फायदा है?
A. हज़ारों नई नौकरियों के अवसर, खासकर टेक्निकल और स्किल्ड प्रोफेशन में।

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