आगरा की हींग की मंडी: जब मसालों से शुरू हुआ सफर, और बन गई जूतों की पहचान

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आगरा की हींग की मंडी

ताजमहल के लिए मशहूर आगरा सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों से नहीं, बल्कि अपनी व्यापारिक मंडियों और उनके दिलचस्प इतिहास के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक है हींग की मंडी—एक ऐसी जगह जो कभी मसालों का हब हुआ करती थी, लेकिन आज भारत की सबसे बड़ी जूता बाजारों में से एक बन चुकी है।


मुगलकाल में शुरू हुआ हींग का व्यापार

आगरा के वरिष्ठ पत्रकार सिराज कुरैशी के अनुसार, मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में यहां हींग का बड़ा व्यापार होता था। अफगानिस्तान से व्यापारी चमड़े के थैलों में हींग भरकर यहां लाते थे। देशभर से कारोबारी इसे खरीदने आते थे, जिससे यह जगह “हींग की मंडी” के नाम से जानी जाने लगी।


चमड़े के थैलों से निकली जूता उद्योग की चिंगारी

इतिहासकार राज किशोर राजे बताते हैं कि अफगानी व्यापारी हींग के साथ जो चमड़े के थैले लाते थे, वापसी में उन्हें यहीं छोड़ देते थे।
स्थानीय कारीगरों ने इन थैलों के चमड़े का उपयोग जूते बनाने में करना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे यह शौक एक बड़े व्यापार में तब्दील हो गया और मसालों की मंडी अब जूते की मंडी बन गई।


दिल्ली और हाथरस की ओर व्यापार का झुकाव

  • जब मुगल राजधानी दिल्ली चली गई, तो हींग व्यापारियों ने भी दिल्ली का रुख किया।
  • अंग्रेजों के दौर में हाथरस हींग के प्रमुख व्यापार केंद्र के रूप में उभरा।
  • इसके बावजूद, आगरा की हींग की मंडी ने अपना वजूद बनाए रखा। यहां जूते के साथ-साथ लकड़ी की टालें और हींग की कुछ दुकानें भी बची रहीं।

विभाजन के बाद जूता कारोबार को मिला नया विस्तार

भारत-पाक विभाजन के दौरान कई मुस्लिम परिवार पाकिस्तान चले गए, लेकिन सिंध और पंजाब से आए नए परिवारों ने इस इलाके को फिर से जीवन दिया।
इन्हीं लोगों ने जूता निर्माण को एक नई दिशा दी, जिससे यह कारोबार और भी व्यापक होता चला गया।


आज की हींग की मंडी: जूता व्यापार का धड़कता दिल

  • वर्तमान में हींग की मंडी में करीब 19 अलग-अलग बाजार हैं।
  • यहां लगभग 4000 जूते की दुकानें मौजूद हैं।
  • हर साल इस क्षेत्र में 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होता है।

यह मंडी अब सिर्फ एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि आगरा की विरासत, मेहनत और उद्यमिता का प्रतीक बन चुकी है।


जानिए क्यों खास है आगरा की यह मंडी

👉 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मुगलकाल से व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र
👉 कला और कौशल: परंपरागत तरीके से जूता निर्माण
👉 रोज़गार का बड़ा केंद्र: हज़ारों लोगों को मिलता है रोजगार
👉 ट्रेडमार्क पहचान: ‘मेड इन आगरा’ जूतों की पहचान दुनिया में


निष्कर्ष

आगरा की हींग की मंडी आज सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक संस्कृति, इतिहास, और व्यापारिक विकास की मिसाल है। जहां एक जमाने में हींग की खुशबू आती थी, वहीं आज मेहनत और हुनर के दम पर भारत के सबसे बड़े जूता व्यापार केंद्र के रूप में इसकी पहचान है।

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