चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला: मानसिक रोगियों के ग्रुप होम में सिक्योरिटी डिपॉजिट होगी कम

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चंडीगढ़ प्रशासन ने मानसिक विकलांगता से ग्रसित लोगों के लिए एक बड़ा और सहानुभूतिपूर्ण कदम उठाया है। ‘उत्थान ग्रुप होम’ में भर्ती के लिए अब अत्यधिक सिक्योरिटी डिपॉजिट देने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रस्ताव पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद तैयार किया गया है।

क्या है नया प्रस्ताव?

‘उत्थान ग्रुप होम’ चंडीगढ़ का एक ऐसा विशेष आवासीय केंद्र है जिसे मानसिक रूप से असमर्थ लोगों के लिए तैयार किया गया है। पहले यहाँ दाखिला लेने के लिए भारी-भरकम सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगी जाती थी, जिससे ज़रूरतमंद परिवारों पर वित्तीय बोझ पड़ता था।

नई प्रस्तावित डिपॉजिट राशि:

  • सुइट रूम: ₹20 लाख (जैसा पहले था)
  • सिंगल रूम: ₹15 लाख
  • डबल रूम: ₹10 लाख

यह प्रस्ताव अब पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की स्वीकृति के लिए भेजा गया है, जिसके बाद इसे उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 को एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए ₹20 लाख की डिपॉजिट को “अत्यधिक और असंवेदनशील” करार दिया था।

क्या कहा कोर्ट ने?

  • यह राशि वास्तविक ज़रूरतमंदों के लिए एक दीवार बन गई है।
  • यह मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 18 से 21 का सीधा उल्लंघन है।
  • मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की पीठ ने प्रशासन से डिपॉजिट कम करने का निर्देश दिया।

ग्रुप होम की विकास यात्रा

  • 2018: माता-पिता और अभिभावकों ने ग्रुप होम की मांग की।
  • 2022: सेक्टर-31 में निर्माण का निर्णय लिया गया।
  • 2024: निर्माण कार्य पूरा, लेकिन संचालन शुरू नहीं हुआ।
  • अक्टूबर 2024: डिपॉजिट ₹20-40 लाख तय हुआ, भारी विरोध हुआ।
  • जून 2024: राशि ₹20 लाख फ्लैट कर दी गई।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया: अब भी असंतोष

हालांकि प्रशासन ने डिपॉजिट घटाने का प्रस्ताव रखा है, फिर भी अभिभावक संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि प्रस्तावित राशि अब भी बहुत अधिक है।

अभिभावकों की मांग:

  • सुइट रूम: ₹4 लाख
  • सिंगल रूम: ₹3 लाख
  • डबल रूम: ₹2 लाख

उनका तर्क है कि यह डिपॉजिट देशभर में NGO संचालित ग्रुप होम्स के मानकों के अनुरूप होनी चाहिए और यह राशि सिर्फ एक साल की फीस जितनी होनी चाहिए, न कि पांच साल की।


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क्या बनेगा एक आदर्श मॉडल?

यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो यह निर्णय मानसिक रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा। साथ ही चंडीगढ़ का यह मॉडल देश के अन्य ग्रुप होम्स के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है — जहां मानवता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाए।

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