कानून की छात्रा और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को कलकत्ता उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिल गई है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उन्हें जांच में पूरा सहयोग देना होगा और भारत से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट का आदेश: 3 शर्तों पर मिली जमानत
जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि:
- शर्मिष्ठा को ₹10,000 का जमानत बांड और सुरक्षा बांड जमा करना होगा।
- उन्हें पासपोर्ट जमा करना होगा।
- वह जांच एजेंसियों के साथ संपर्क में रहेंगी।
- उन्हें उचित पुलिस सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी।
क्या है मामला?
- पुणे की लॉ छात्रा शर्मिष्ठा पनोली को एक विवादित वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
- उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा।
- पहले कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है।”
- कोर्ट ने राज्य सरकार को केस डायरी पेश करने को कहा था।
वकील का पक्ष: गिरफ्तारी को बताया गलत
शर्मिष्ठा के वकील डीपी सिंह ने दलील दी कि:
- एफआईआर में दर्ज धाराएं गैर-संज्ञेय थीं, इसलिए बिना नोटिस के गिरफ्तारी अवैध है।
- शर्मिष्ठा ने विवादित वीडियो 8 मई को हटा लिया था।
- उनके परिवार ने पुलिस को यह भी सूचित किया कि वह खतरे में हैं।
- उन्होंने एफआईआर रद्द करने और ज़मानत देने की मांग की।
वकील का कहना है कि वीडियो सिर्फ 5-10 सेकंड का था, और उनकी मंशा किसी को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। वे इसे भावनात्मक प्रतिक्रिया बता रहे हैं।
सरकार का पक्ष: कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ
राज्य सरकार ने कहा:
- नोटिस जारी किया गया था, लेकिन शर्मिष्ठा और उनका परिवार गुरुग्राम भाग गए।
- कई प्रयासों के बाद जब नोटिस नहीं दिया जा सका, तो गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ।
- इसके बाद उन्हें गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया।
सरकार ने दावा किया कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
वायरल वीडियो और गिरफ्तारी
- वीडियो में बॉलीवुड सितारों की चुप्पी पर सवाल उठाया गया था, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर।
- इसके बाद कोलकाता पुलिस ने शर्मिष्ठा को गिरफ्तार कर लिया।
- अदालत ने उन्हें 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा था।
शर्मिष्ठा ने मांगी माफी
वीडियो के बाद मचे विवाद के बीच शर्मिष्ठा ने:
- सोशल मीडिया पर बिना शर्त माफी मांगी।
- कहा कि उनकी भावनाएं निजी थीं, और किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।
- उन्होंने वादा किया कि आगे से सार्वजनिक पोस्ट में सावधानी बरतेंगी।
उनकी पोस्ट में लिखा था:
“मैं बिना शर्त माफी मांगती हूं। मेरी भावनाएं व्यक्तिगत थीं। अगर किसी को ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा चाहती हूं।”
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी, और कानूनी प्रक्रिया के संतुलन को दिखाता है। हाईकोर्ट का निर्णय बताता है कि कानून के तहत सभी को न्याय मिलने का अधिकार है, लेकिन किसी की धार्मिक या सामाजिक भावना को ठेस पहुंचाना गलत है।





