परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: मोदी सरकार बनाएगी निजी निवेश के लिए अनुकूल कानून

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली: मोदी सरकार परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार की योजना है कि मौजूदा परमाणु ऊर्जा संबंधी कानूनों में संशोधन कर निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना है।

निजी कंपनियों को मिलेगा मौका

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ‘एटॉमिक एनर्जी एक्ट’ और ‘सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट’ में बदलाव पर विचार कर रही है। इससे न केवल निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का अवसर मिलेगा, बल्कि उपकरणों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों की जवाबदेही भी सीमित की जा सकेगी। यह पहल भारत में परमाणु ऊर्जा को तेजी से विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

2020 में खुला था निजी भागीदारी का रास्ता

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 के बजट में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद से सरकार इस दिशा में कई सुधार कर चुकी है। वर्तमान में सरकार नियामक तंत्र में सुधार लाने के लिए भी इन-स्पेस (IN-SPACe) मॉडल का अध्ययन कर रही है, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रमोटर और रेगुलेटर की दोहरी भूमिका निभा रहा है।

2033 तक 5 छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर होंगे तैयार

भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) फिलहाल देश में 8.7 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन कर रहा है। सरकार की योजना है कि 2033 तक 5 छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तैयार किए जाएं। इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये के विशेष बजट के साथ परमाणु ऊर्जा मिशन की शुरुआत की गई है।

वैश्विक कंपनियों की भी रुचि

सरकार के प्रयासों से कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में परमाणु संयंत्र स्थापित करने में रुचि दिखाई है। वर्ष 2008 में भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद जब भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) से छूट मिली, तो वैश्विक परमाणु व्यापार के दरवाजे भारत के लिए खुल गए। हालांकि, 2010 का ‘सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट’ निवेश की राह में एक बाधा बन गया था, जिसे अब सरकार दूर करना चाहती है।

2047 तक 100 गीगावाट उत्पादन का लक्ष्य

सरकार की दीर्घकालिक योजना है कि देश में 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का उत्पादन किया जाए, जिसमें लगभग 50% उत्पादन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल से आएगा।

वित्तीय मॉडल और विधायी सिफारिशें

एक संसदीय समिति ने इस दिशा में सुझाव दिया है कि मजबूत वित्तीय मॉडल तैयार किया जाए, जिसमें सरकारी सहायता, वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और गारंटी जैसी व्यवस्थाएं शामिल हों, ताकि घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। साथ ही, समिति ने यह भी सिफारिश की है कि कानूनों में संशोधन की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जाए।

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