कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर बताया कि उनकी सरकार ने रोहित वेमुला एक्ट का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। यह कानून शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- राहुल गांधी के आग्रह के बाद कर्नाटक सरकार ने इस कानून को जल्द लागू करने का फैसला किया।
- यह एक्ट रोहित वेमुला के नाम पर प्रस्तावित है, जो 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र होने के कारण भेदभाव का शिकार हुए और आत्महत्या कर ली थी।
- इस कानून का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में समानता लाना और छात्रों को भेदभाव से बचाना है।
सिद्धारमैया का पत्र:
- उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी छात्र को जाति के आधार पर भेदभाव नहीं झेलना चाहिए।
- दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों को मुख्यधारा में लाने पर जोर दिया।
- कानूनी टीम को मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
राहुल गांधी की मांग:
राहुल गांधी ने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों की मौतों का उदाहरण देते हुए कहा था कि शिक्षण संस्थानों में व्याप्त जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए ठोस कानून बनाया जाना चाहिए।
एक्ट का उद्देश्य:
- विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव पर रोक लगाना।
- पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाना और शिक्षा में समानता सुनिश्चित करना।
यह पहल संस्थागत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें कर्नाटक सरकार अग्रणी भूमिका निभा रही है।





